जैसे ही लोगों के कान में “शनि की साढ़ेसाती” शब्द पड़ता है, सबसे पहले डर लगता है. आम तौर पर कहा जाता है कि साढ़ेसाती में नौकरी चली जाती है, पैसा रुक जाता है, घर में क्लेश बढ़ जाता है और मन हमेशा परेशान रहता है. लेकिन सच्चाई यह है कि साढ़ेसाती हमेशा बुरा ही करे, ऐसा जरूरी नहीं है. यह समय असल में इंसान को जिम्मेदार, समझदार और मजबूत बनाने का होता है.
शनि को अक्सर सजा देने वाला ग्रह कहा जाता है, लेकिन शनि बिना वजह किसी को परेशान नहीं करते. शनि हमारे किए हुए कामों का हिसाब रखते हैं. अगर आपने मेहनत की है, ईमानदारी से काम किया है, तो शनि उसका अच्छा फल भी देते हैं और अगर गलत रास्ता चुना है, तो वही बातें सामने आ जाती हैं. सीधी भाषा में कहें तो शनि कहते हैं – “जैसा करोगे, वैसा ही पाओगे.”
साढ़ेसाती के समय जिंदगी थोड़ी सख्त हो जाती है. पहले जो काम आराम से हो जाता था, अब उसके लिए ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है. खर्चे बढ़ सकते हैं, जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं और मन भी थोड़ा भारी रहता है. इसका कारण यह है कि साढ़ेसाती इंसान को आराम की ज़ोन से बाहर निकालती है और मेहनती बनाती है. यह समय इंसान को मज़बूत बनाने के लिए होता है, तोड़ने के लिए नहीं.
यह सबसे बड़ा भ्रम है. बहुत से लोगों को साढ़ेसाती के दौरान ही बड़ी नौकरी, प्रमोशन या पहचान मिलती है. जो लोग ईमानदारी से काम करते हैं, धैर्य रखते हैं और शॉर्टकट नहीं अपनाते, उनके लिए साढ़ेसाती फायदेमंद साबित होती है. लेकिन जो लोग पहले से ही गलत रास्ते पर होते हैं, उनके लिए यह समय मुश्किल बन जाता है, क्योंकि छुपी हुई समस्याएं बाहर आ जाती हैं.
हर इंसान की कुंडली अलग होती है, इसलिए साढ़ेसाती का असर भी अलग-अलग होता है. किसी के लिए यह पैसों की परेशानी ला सकती है, तो किसी के लिए करियर में बड़ा मौका. इसलिए किसी और की साढ़ेसाती देखकर घबराने की जरूरत नहीं है. आपका अनुभव आपके कर्मों और मेहनत पर निर्भर करता है.
जब शनि, चंद्रमा की राशि से एक राशि पहले आते हैं, फिर उसी राशि में रहते हैं और फिर एक राशि आगे जाते हैं, तो इस पूरे समय को साढ़ेसाती कहते हैं. इसमें लगभग साढ़े सात साल लगते हैं. अभी शनि कुंभ राशि में हैं, इसलिए मकर, कुंभ और मीन राशि वालों पर साढ़ेसाती चल रही मानी जाती है.
अक्सर लोग कहते हैं कि जो गलत काम करते हैं, वही आगे बढ़ रहे हैं. ज्योतिष कहता है कि ऐसे लोग अपने पुराने अच्छे कर्मों का फल पा रहे होते हैं, लेकिन नए गलत कर्म भी जोड़ रहे होते हैं. शनि देर से आते हैं, लेकिन सबका हिसाब पूरा करते हैं. इसलिए दूसरों से जलने की बजाय खुद को बेहतर बनाना ही सही रास्ता है.
जो लोग मेहनती होते हैं, सच्चे होते हैं और जिम्मेदारी से काम करते हैं, उनके लिए शनि मददगार बन जाते हैं. कुछ राशियों में शनि ज़्यादा अच्छा फल देते हैं, लेकिन असली बात यह है कि शनि कर्म देखते हैं, राशि नहीं.
साढ़ेसाती में डरने के बजाय अपने काम और सोच पर ध्यान देना चाहिए.
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