कोलकाता हाई कोर्ट ने बुधवार को I-PAC के दफ्तर और प्रवीण जैन के घर पर हुई ईडी छापों के मामले में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की याचिका को खारिज कर दिया। टीएमसी यह याचिका दायर कर पार्टी से जुड़े डेटा की सुरक्षा की मांग कर रही थी। हाई कोर्ट ने ईडी की यह साफ बात रिकॉर्ड कि कि 8 जनवरी को की गई छापेमारी में किसी भी प्रकार का डेटा या दस्तावेज जब्त नहीं किया गया।
टीएमसी ने अपना मामला केवल एक छोटे मुद्दे तक सीमित रखा था यदि कोई राजनीतिक या संवेदनशील डेटा जब्त हुआ हो, तो उसे सुरक्षित रखने की मांग। पार्टी ने कोर्ट से आग्रह किया कि ईडी का बयान औपचारिक रूप से रिकॉर्ड किया जाए कि कोई डेटा नहीं लिया गया। इसके बाद ही याचिका पर फैसला किया जा सके।
टीएमसी ने यह भी कहा कि छह साल से रखे जा रहे राजनीतिक डेटा के बारे में उन्हें डर था कि वह गलत हाथों में चला जा सकता है। हालांकि पार्टी ने याचिका वापस नहीं ली, बल्कि सिर्फ ईडी का आश्वासन रिकॉर्ड करने की मांग की।
ईडी ने कोर्ट को बताया कि छापेमारी में किसी भी रिकॉर्ड, दस्तावेज या डिजिटल डेटा को जब्त नहीं किया गया। पंचनामा में भी यह दर्ज है कि कुछ भी जब्त नहीं हुआ और कोई डेटा का बैकअप भी नहीं बनाया गया।
ईडी ने यह भी कहा कि याचिका करने वाले व्यक्ति का छापेमारी से कोई संबंध नहीं था और उसने कुछ देखा या सुना भी नहीं। इसलिए याचिका आधारहीन और अस्पष्ट थी।
8 जनवरी को ईडी ने कोलकाता में राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म I-PAC और इसके निदेशक प्रवीण जैन के घर पर छापेमारी की। यह छापेमारी एक कथित कोयला चोरी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच में की गई थी।
ईडी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने छापेमारी स्थल पर प्रवेश कर महत्वपूर्ण सबूत, जैसे दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, हटा दिए। टीएमसी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ईडी ने अपनी सीमा पार कर दी।
इसके बाद ईडी ने हाई कोर्ट में मुख्यमंत्री के खिलाफ CBI जांच की मांग भी की थी। हाई कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई बुधवार, 14 जनवरी तक के लिए स्थगित कर दी।
इस फैसले के बाद साफ हो गया कि I-PAC मामले में टीएमसी की याचिका अब कोई असर नहीं रखती, क्योंकि ईडी ने स्पष्ट रूप से कहा कि कुछ भी जब्त नहीं किया गया।
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