नए साल की शुरुआत के साथ ही उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. योगी आदित्यनाथ सरकार में जल्द ही बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं. चर्चा है कि सरकार और संगठन-दोनों स्तरों पर फेरबदल की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है. मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास पर हुई एक अहम बैठक के बाद इन अटकलों को और मजबूती मिली है.
मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवास पर एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए. इस बैठक में हाल ही में बने प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी भी मौजूद थे. इसके अलावा संगठन महामंत्री धर्मपाल, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक भी बैठक का हिस्सा बने.
सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में सरकार और संगठन दोनों में बदलाव को लेकर विस्तार से चर्चा हुई. माना जा रहा है कि पहले योगी मंत्रिमंडल का विस्तार किया जाएगा और उसके बाद संगठन में बड़े पैमाने पर बदलाव होंगे.
पार्टी सूत्रों की मानें तो योगी सरकार का कैबिनेट विस्तार सबसे पहले किया जाएगा. इसके बाद भाजपा संगठन में फेरबदल होगा. नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी अपने स्तर पर संगठन को मजबूत करने के लिए नई टीम तैयार कर सकते हैं. इस प्रक्रिया में कुछ नेताओं को संगठन में समायोजित किया जा सकता है, जबकि कुछ को सरकार में जिम्मेदारी दी जा सकती है. यानी कई नेताओं की भूमिका बदली जा सकती है.
इस बार होने वाले फेरबदल में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन पर खास ध्यान दिया जा रहा है. फिलहाल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी-दोनों ही पूर्वांचल से आते हैं. ऐसे में पार्टी चाहती है कि पश्चिम यूपी, अवध और बुंदेलखंड क्षेत्र को भी मजबूत प्रतिनिधित्व मिले. इसी वजह से मंत्रिमंडल विस्तार और संगठनात्मक बदलाव में इन क्षेत्रों से जुड़े नेताओं को आगे लाने की संभावना जताई जा रही है.
बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि अब तक यूपी भाजपा अध्यक्ष रहे भूपेंद्र चौधरी को कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है. भूपेंद्र चौधरी जाट समुदाय से आते हैं और पश्चिम यूपी में जाट समाज का प्रभाव काफी मजबूत माना जाता है. अगर उन्हें मंत्रिमंडल में जगह मिलती है, तो इससे जाट समाज को बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश होगी. पार्टी पश्चिम यूपी में अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती है.
योगी सरकार के कैबिनेट विस्तार को लेकर अंतिम फैसला दिल्ली में लिया जाएगा. बताया जा रहा है कि जनवरी के पहले सप्ताह में इस संबंध में आधिकारिक घोषणा हो सकती है. हालांकि शपथ ग्रहण समारोह मकर संक्रांति के बाद ही आयोजित किया जाएगा. इस बीच इस बात पर चर्चा चल रही है कि किन नेताओं के नाम केंद्रीय नेतृत्व को भेजे जाएं. संघ से भी इस पूरे मामले में राय ली गई है.
कैबिनेट विस्तार और संगठनात्मक बदलाव के जरिए भाजपा समाजवादी पार्टी के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) नैरेटिव को भी काउंटर करने की तैयारी में है. पार्टी चाहती है कि सामाजिक संतुलन साधते हुए सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व दिया जाए. इसी रणनीति के तहत मंत्रिमंडल और संगठन में नए चेहरों को जगह मिल सकती है.
मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पूरे दिन लखनऊ में ही रहे. बैठक के बाद उन्होंने कई नेताओं से अलग-अलग मुलाकात भी की. इससे यह साफ है कि सरकार और संगठन में बदलाव को लेकर मंथन अंतिम चरण में है.
कुल मिलाकर, नए साल में उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई तस्वीर देखने को मिल सकती है. योगी सरकार का यह फेरबदल न सिर्फ सरकार की दिशा तय करेगा, बल्कि 2024 के बाद की राजनीति के लिहाज से भी काफी अहम माना जा रहा है. अब सबकी नजरें दिल्ली के फैसले और जनवरी में होने वाले ऐलान पर टिकी हैं.
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