Pune Municipal Election 2025: महाराष्ट्र में आगामी पुणे महानगरपालिका (पीएमसी) चुनावों से पहले सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन में बड़ी दरार नजर आने लगी है. एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर गंभीर आरोप लगाए हैं. शिवसेना का कहना है कि भाजपा ने चुनाव से पहले हुए गठबंधन में उसे सम्मानजनक सीटें नहीं दीं, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं में भारी नाराजगी है.
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पहले ही ऐलान कर चुके थे कि राज्य की सभी 29 नगर निगमों में भाजपा और शिवसेना मिलकर चुनाव लड़ेंगी. लेकिन जब पुणे महानगरपालिका के लिए सीट बंटवारे का फॉर्मूला सामने आया, तो शिवसेना भड़क उठी. भाजपा ने कुल 165 सीटों में से केवल 16 सीटें शिवसेना को देने का प्रस्ताव रखा, जिसे शिंदे गुट की शिवसेना ने सिरे से खारिज कर दिया. शिवसेना का कहना है कि पुणे जैसे बड़े शहर में इतनी कम सीटें देना अपमानजनक है और इससे गठबंधन की भावना को ठेस पहुंची है.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, शिवसेना नेता अजय भोसले ने भाजपा पर नाराजगी जताते हुए कहा कि भाजपा का व्यवहार पार्टी को आहत करने वाला है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह सीट शेयरिंग फॉर्मूला किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जा सकता. उन्होंने यह भी बताया कि शिवसेना ने 60 इच्छुक उम्मीदवारों को आधिकारिक पार्टी दस्तावेज दे दिए हैं, जिससे साफ है कि पार्टी अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी में है.
वहीं शिवसेना पुणे शहर इकाई के प्रमुख नाना भांगिरे ने भी तीखा बयान देते हुए कहा कि पुणे में भाजपा के साथ गठबंधन अब लगभग खत्म हो चुका है.
इस पूरे विवाद के बीच भाजपा ने उन सीटों पर भी अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है, जिन पर शिवसेना दावा कर रही थी. इससे शिवसेना नेताओं की नाराजगी और बढ़ गई है. शिवसेना का आरोप है कि भाजपा ने जीत की मजबूत संभावना न होने के बावजूद भी अधिकतर सीटें अपने पास रख लीं. पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो शिवसेना पुणे मनपा की सभी सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है.
गौरतलब है कि 2017 के पुणे मनपा चुनावों में शिवसेना ने 10 सीटों पर जीत दर्ज की थी. इनमें से सात पार्षद बाद में भाजपा में शामिल हो गए थे. अब भाजपा ने इन्हीं पूर्व शिवसेना पार्षदों को टिकट देकर मैदान में उतार दिया है. शिवसेना इसे राजनीतिक विश्वासघात मान रही है और इसी वजह से पार्टी कार्यकर्ताओं में असंतोष और गहराता जा रहा है.
राजनीतिक हलचल के बीच शिवसेना अब नए गठबंधन विकल्पों पर भी विचार कर रही है. सोमवार रात शिवसेना नेता रविंद्र धांगलेकर ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख अजित पवार से मुलाकात की. इस बैठक में संभावित गठबंधन को लेकर चर्चा हुई. धांगलेकर के अनुसार, अजित पवार ने इस प्रस्ताव पर विचार करने और जल्द जवाब देने का आश्वासन दिया है.
इधर शिवसेना के मंत्री उदय सामंत भी पुणे पहुंचे और उन्होंने स्थानीय नेताओं के साथ बैठक कर चुनावी रणनीति पर मंथन किया. इस बैठक में यह संकेत मिला कि पार्टी किसी भी स्थिति के लिए खुद को तैयार कर रही है, चाहे वह अकेले चुनाव लड़ना हो या किसी नए राजनीतिक साथी के साथ मैदान में उतरना.
कुल मिलाकर, पुणे मनपा चुनाव से ठीक पहले भाजपा और शिवसेना के रिश्तों में आई खटास ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है. अगर शिवसेना गठबंधन से अलग होकर चुनाव लड़ती है, तो इसका सीधा असर पुणे के राजनीतिक समीकरणों पर पड़ेगा.
अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि शिवसेना भाजपा से पूरी तरह अलग होकर अकेले मैदान में उतरती है या फिर किसी नए राजनीतिक गठबंधन के जरिए चुनावी रणनीति बनाती है. आने वाले दिनों में पुणे की राजनीति और ज्यादा दिलचस्प होने वाली है.
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