Punjab News: पंजाब कांग्रेस इन दिनों अंदरूनी खींचतान के दौर से गुजर रही है. पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के दलित प्रतिनिधित्व से जुड़े बयान के बाद पार्टी के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं. इस पूरे विवाद के बीच कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने पार्टी नेताओं को सख्त संदेश देते हुए कहा है कि जाति और धर्म की राजनीति से दूर रहना चाहिए, क्योंकि ऐसी राजनीति अंततः नुकसान ही पहुंचाती है.
राजा वडिंग ने बिना किसी का नाम लिए स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांग्रेस की विचारधारा लोगों को जोड़ने की है, न कि बांटने की. उन्होंने कहा कि जाति-धर्म के आधार पर राजनीति करना भारतीय जनता पार्टी का तरीका हो सकता है, लेकिन कांग्रेस इस रास्ते पर नहीं चलती. वडिंग ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जो भी नेता इस आग से खेलेगा, वह खुद ही इसमें जल जाएगा.
चरणजीत सिंह चन्नी के उस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए, जिसमें उन्होंने पंजाब कांग्रेस में दलित नेताओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व न मिलने की बात कही थी, राजा वडिंग ने पार्टी के पुराने फैसलों की याद दिलाई. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने चन्नी को उस समय मुख्यमंत्री बनाया था, जब उनके समर्थन में एक भी विधायक सामने नहीं था. यह फैसला पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने लिया था, जो यह दिखाता है कि कांग्रेस ने दलित समाज को सम्मान और प्रतिनिधित्व देने में कोई कमी नहीं छोड़ी.
वडिंग ने यह भी संकेत दिया कि ऐसे मुद्दों को सार्वजनिक मंचों पर उठाने से पार्टी को नुकसान हो सकता है, खासकर तब जब पंजाब में आगामी चुनावों की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं.
इस विवाद के बीच कांग्रेस की आंतरिक राजनीति और ज्यादा गर्मा गई है. पार्टी के करीब 35 नेताओं ने केंद्रीय नेतृत्व को चिट्ठी लिखकर मुलाकात का समय मांगा है. बताया जा रहा है कि ये सभी नेता चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थक हैं, जिनमें कई पूर्व मंत्री और पूर्व विधायक भी शामिल हैं. इन नेताओं का कहना है कि वे पंजाब कांग्रेस की जमीनी स्थिति और संगठन से जुड़े मुद्दों पर शीर्ष नेतृत्व से खुलकर बात करना चाहते हैं.
पूर्व मंत्री भारत भूषण आशु, पूर्व विधायक कुशलदीप सिंह ‘किक्की’ ढिल्लों और पूर्व विधायक इंद्रवीर सिंह बोलारिया ने चन्नी का खुलकर समर्थन किया है. इन नेताओं का कहना है कि चन्नी ने पार्टी मीटिंग में कोई गलत बात नहीं कही. उनके मुताबिक कांग्रेस की मूल विचारधारा ही सामाजिक न्याय और सभी वर्गों को समान प्रतिनिधित्व देने की रही है.
समर्थक नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि चन्नी के बयान को जानबूझकर तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है. उन्होंने कहा कि इससे पहले भी दलितों और जट्ट सिखों के बीच मतभेद पैदा करने की कोशिशें होती रही हैं, जो पंजाब की सामाजिक एकता के लिए घातक हैं.
पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस के लिए यह अंदरूनी विवाद बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. पार्टी के सामने सबसे बड़ी जरूरत संगठन को एकजुट रखने और आपसी मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने की है. आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि कांग्रेस नेतृत्व इस सियासी खींचतान को किस तरह संभालता है और पार्टी को एक मजबूत दिशा में कैसे आगे बढ़ाता है.
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