वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद से अमेरिका और वेनेजुएला के बीच रिश्ते और ज्यादा बिगड़ गए हैं. यह मामला अब सिर्फ एक गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि दोनों देशों के बीच टकराव और राजनीतिक तनाव की बड़ी वजह बन गया है. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुले तौर पर यह दावा किया है कि वेनेजुएला पर अब उनका नियंत्रण है और जरूरत पड़ी तो अमेरिका आगे भी सख्त कदम उठाएगा.
डोनाल्ड ट्रंप ने बयान दिया कि अगर वेनेजुएला की अंतरिम सरकार अमेरिका का सहयोग नहीं करती है, तो कार्रवाई का दूसरा दौर भी शुरू किया जा सकता है. ट्रंप का कहना है कि अमेरिका वेनेजुएला की स्थिति पर पूरी नजर रखे हुए है और वहां की सरकार को जवाबदेह बनाया जाएगा. इस बयान ने लैटिन अमेरिका समेत पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है.
वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने ट्रंप के बयान पर कड़ा जवाब दिया है. उन्होंने कहा कि वेनेजुएला एक शांतिपूर्ण और संप्रभु देश है और किसी भी बाहरी ताकत के अधीन नहीं है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अमेरिका ने हमला किया है, यह कोई युद्ध नहीं था. साथ ही उन्होंने राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को तुरंत रिहा कर वेनेजुएला लौटाने की मांग की है.
अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद वेनेजुएला में हालात बेहद गंभीर हो गए हैं. कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने हमले में मारे गए लोगों की याद में 7 दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है. उन्होंने कहा कि देश के जवान राष्ट्रपति और राष्ट्र की रक्षा करते हुए शहीद हुए हैं और उनके बलिदान को सम्मान देना जरूरी है. हालांकि सरकार ने अब तक मृतकों और घायलों की आधिकारिक संख्या जारी नहीं की है. इसके लिए एक विशेष जांच आयोग बनाया गया है.
इस सैन्य कार्रवाई में क्यूबा को भी बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है. क्यूबा सरकार ने पुष्टि की है कि उनके 32 सैन्य और पुलिस अधिकारी इस हमले में मारे गए हैं. इसके बाद क्यूबा ने भी 2 दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया. वेनेजुएला के अटॉर्नी जनरल ने इस पूरे मामले को संभावित युद्ध अपराध बताया है और अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की है.
अमेरिका की ओर से इस ऑपरेशन में करीब 200 सैनिक शामिल थे. रिपोर्ट के मुताबिक 6 अमेरिकी सैनिक घायल हुए, जिनमें से 2 की हालत गंभीर बताई गई. बाकी घायल सैनिकों को इलाज के बाद दोबारा ड्यूटी पर भेज दिया गया है.
मादुरो की गिरफ्तारी को लेकर अमेरिका में भी एक राय नहीं है. वॉशिंगटन पोस्ट और SSRS के सर्वे के अनुसार 40 फीसदी अमेरिकी लोग इस कार्रवाई को सही मानते हैं, जबकि 45 फीसदी लोग इसके खिलाफ हैं. करीब 20 फीसदी लोग अब भी असमंजस में हैं. मादुरो को अमेरिका ले जाने के बाद ड्रग तस्करी के मामले में अदालत में पेश किया गया है और उनकी अगली सुनवाई 17 मार्च को तय की गई है.
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