देश के बड़े शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक सरकारी जमीन पर अतिक्रमण का मामला नया नहीं है, लेकिन दिल्ली का तुर्कमान गेट इन दिनों फिर चर्चा में है. राजधानी के इस ऐतिहासिक इलाके में फैज-ए-इलाही मस्जिद के आसपास कथित अवैध अतिक्रमण के कारण हाल ही में बवाल मचा. दिल्ली हाईकोर्ट ने अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया, जिसके बाद बुलडोजर के साथ कार्रवाई शुरू हुई. इस दौरान पत्थरबाजी, आंसू गैस और भारी पुलिस बल की तैनाती देखने को मिली.
तुर्कमान गेट शाहजहां द्वारा बसाए गए शाहजहानाबाद के प्रमुख दरवाजों में से एक है. 17वीं शताब्दी में बने इस गेट का निर्माण उस समय हुआ था जब दिल्ली एक मजबूत किलेबंद राजधानी बन रही थी. गेट का नाम प्रसिद्ध सूफी संत शाह तुर्कमान के नाम पर पड़ा, जिनकी दरगाह गेट के पास स्थित है. यहां हर साल उनका उर्स आयोजित होता है, जिससे यह इलाका धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बन गया.
तुर्कमान गेट एक आयताकार संरचना है, जिसमें तीन मेहराबी प्रवेश द्वार और दो मंजिला बुर्ज है. यह मुगल कला का एक बेहतरीन उदाहरण माना जाता है. हालांकि अक्सर यह कहा जाता है कि औरंगजेब का गेट से कोई संबंध है, लेकिन इसका कोई सीधा ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है. यह भ्रम सोशल मीडिया और अधूरी जानकारी की वजह से फैला.
तुर्कमान गेट का नाम सबसे पहले 13 अप्रैल 1976 में बड़े पैमाने पर चर्चा में आया. उस समय आपातकाल लागू था और संजय गांधी के निर्देश पर दिल्ली में झुग्गी हटाओ अभियान चलाया गया. तुर्कमान गेट इलाके में भी पहली बार बुलडोजर पहुंचा और झुग्गियां हटाई गईं.
संजय गांधी के फैसले के बाद पुरानी दिल्ली में भारी विरोध हुआ. जामा मस्जिद, चांदनी चौक और तुर्कमान गेट में लोग सड़कों पर उतर आए. मजदूर संगठनों और वामपंथी दलों ने विरोध को संगठित किया. यह विरोध जल्द ही हिंसक रूप ले गया. 19 अप्रैल 1976 को इलाके में बेकाबू हालात बन गए. बुलडोजर चलने के दौरान लोग सड़कों पर उतरे, पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया. इस हिंसक टकराव में कई लोग घायल हुए और यह दिल्ली के इतिहास का एक दुखद अध्याय बन गया.
करीब पांच दशक बाद तुर्कमान गेट फिर सुर्खियों में है. इस बार विवाद फैज-ए-इलाही मस्जिद और उसके आसपास सरकारी जमीन पर अवैध अतिक्रमण को लेकर है. अदालत ने अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया और 6 जनवरी 2025 को बुलडोजर से कार्रवाई शुरू हुई.
इस दौरान स्थानीय लोगों ने विरोध किया और पत्थरबाजी शुरू हो गई. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया और पूरे इलाके को छावनी में बदल दिया. MCD और पुलिस बल ने बुलडोजर के साथ अतिक्रमण हटाने का काम शुरू किया.
तुर्कमान गेट का मामला दर्शाता है कि ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा और सरकारी जमीन पर अतिक्रमण रोकना कितना जरूरी है. चाहे यह मामला 1976 का हो या 2025 का, प्रशासन की कार्रवाई और स्थानीय विरोध हमेशा सुर्खियों में रहती है. तुर्कमान गेट सिर्फ एक गेट नहीं, बल्कि दिल्ली की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान है, जिसे सुरक्षित रखना हर नागरिक और प्रशासन की जिम्मेदारी है.
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