बलोच नेता मीर यार बलोच ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर को एक खुला पत्र लिखकर नए वर्ष 2026 की शुभकामनाएं दी हैं. यह पत्र केवल औपचारिक बधाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें भारत और बलूचिस्तान के संबंधों, आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष और क्षेत्रीय राजनीति से जुड़े कई गंभीर मुद्दों पर बात की गई है. पत्र के माध्यम से उन्होंने भारत सरकार और भारतीय जनता का ध्यान बलूचिस्तान की स्थिति की ओर खींचने की कोशिश की है.
मीर यार बलोच ने अपने पत्र की शुरुआत भारत के लोगों को नए साल की बधाई देकर की. उन्होंने कहा कि वो रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान के करोड़ों नागरिकों की ओर से भारत की जनता, संसद, मीडिया, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों को शुभकामनाएं देते हैं. उनके अनुसार, भारत जैसे बड़े लोकतांत्रिक देश से बलूच जनता को हमेशा नैतिक समर्थन की उम्मीद रही है.
पत्र में भारत और बलूचिस्तान के बीच पुराने ऐतिहासिक संबंधों का भी जिक्र किया गया है. मीर यार बलोच ने लिखा कि दोनों क्षेत्रों के बीच सांस्कृतिक, व्यापारिक और सामाजिक रिश्ते सदियों पुराने हैं. उन्होंने हिंगलाज माता मंदिर, जिसे नानी मंदिर भी कहा जाता है, का उल्लेख करते हुए बताया कि यह स्थल भारत और बलूचिस्तान के बीच साझा आस्था और सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक है. उनके अनुसार, यह संबंध केवल राजनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि लोगों की भावनाओं से जुड़े हुए हैं.
मीर यार बलोच ने पत्र में भारत द्वारा आतंकवाद के खिलाफ उठाए गए कदमों की सराहना की है। उन्होंने कहा कि भारत ने अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए जो कदम उठाए हैं, वे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए जरूरी हैं. उनके अनुसार, आतंकवाद केवल किसी एक देश की समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र को प्रभावित करता है. इसलिए इसके खिलाफ सख्त रुख अपनाना जरूरी हो जाता है.
पत्र का एक बड़ा हिस्सा बलूचिस्तान की मौजूदा हालत पर केंद्रित है. मीर यार बलोच ने लिखा कि बलूचिस्तान पिछले कई दशकों से पाकिस्तान के नियंत्रण में है और वहां के लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान बलूच जनता को राजनीतिक अधिकार, संसाधनों पर नियंत्रण और सुरक्षा जैसी बुनियादी जरूरतों से वंचित रखा गया.
मीर यार बलोच ने अपने पत्र में मानवाधिकार उल्लंघनों की बात भी उठाई. उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान में आम नागरिकों को डर और असुरक्षा के माहौल में जीना पड़ रहा है. कई परिवारों को विस्थापन, हिंसा और अन्याय का सामना करना पड़ा है. उनके अनुसार, इन समस्याओं पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए ताकि हालात सुधर सकें.
पत्र में चीन और पाकिस्तान के बढ़ते सहयोग को लेकर भी चिंता जताई गई है. मीर यार बलोच का मानना है कि इस गठजोड़ का असर केवल बलूचिस्तान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और संतुलन प्रभावित हो सकता है. उन्होंने कहा कि बड़े देशों को इस स्थिति को गंभीरता से समझने की जरूरत है.
अपने पत्र के अंत में मीर यार बलोच ने कहा कि बलूचिस्तान के लोग लंबे समय से शांति और आत्मनिर्णय की मांग कर रहे हैं. उनके अनुसार, समस्या का समाधान केवल ताकत से नहीं, बल्कि संवाद और न्याय के रास्ते से निकल सकता है. उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय समुदाय, खासकर भारत जैसे देश, इस मुद्दे को समझेंगे और शांति की दिशा में सकारात्मक भूमिका निभाएंगे.
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