New Year 2026: नया साल आते ही ज्यादातर लोग अपने खर्च, बचत और भविष्य को लेकर नए संकल्प लेते हैं. साल 2026 में महंगाई पहले से ज्यादा महसूस हो रही है. रोजमर्रा की चीजें, पढ़ाई, इलाज, घर का किराया और ट्रांसपोर्ट सब पर खर्च बढ़ा है. ऐसे समय में केवल सैलरी पर निर्भर रहना कई लोगों के लिए मुश्किल हो सकता है. इसलिए जरूरत है ऐसी योजना की, जिससे धीरे-धीरे अतिरिक्त आमदनी का रास्ता बने और भविष्य भी सुरक्षित रहे.
नीचे कुछ ऐसे निवेश विकल्पों की चर्चा है, जिन्हें समझकर और सोच-समझकर अपनाया जाए, तो लंबे समय में सैलरी पर निर्भरता कम की जा सकती है.
म्यूचुअल फंड में SIP यानी सिस्टमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान एक आसान तरीका है. इसमें हर महीने एक तय रकम निवेश की जाती है. यह रकम छोटी भी हो सकती है, जैसे 500 या 1000 रुपये. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि बाजार ऊपर-नीचे होता रहता है, लेकिन हर महीने निवेश करने से जोखिम अपने आप संतुलित हो जाता है.
लंबे समय तक SIP करने से कंपाउंडिंग का असर दिखने लगता है. यानी जो पैसा पहले निवेश किया गया था, उस पर भी कमाई होने लगती है. 10–15 साल में यह छोटी-छोटी रकम एक अच्छे फंड में बदल सकती है. जो लोग अभी नौकरी की शुरुआत में हैं, उनके लिए यह आदत भविष्य में बड़ा सहारा बन सकती है.
अगर कोई व्यक्ति जोखिम से दूर रहना चाहता है, तो पोस्ट ऑफिस की योजनाएं आज भी भरोसे का नाम हैं. मंथली इनकम स्कीम, टाइम डिपॉजिट और रिकरिंग डिपॉजिट जैसे विकल्प नियमित आमदनी देने में मदद करते हैं.
इन योजनाओं में रिटर्न बहुत ज्यादा नहीं होता, लेकिन पैसा सुरक्षित रहता है. सरकार की गारंटी होने से चिंता कम रहती है. जो लोग रिटायरमेंट के करीब हैं या जिनकी आय सीमित है, उनके लिए यह योजनाएं स्थिर आमदनी का आधार बन सकती हैं.
कुछ कंपनियां अपने मुनाफे का हिस्सा निवेशकों को डिविडेंड के रूप में देती हैं. अगर सही और मजबूत कंपनियों के शेयर चुने जाएं, तो समय-समय पर डिविडेंड से अतिरिक्त नकद आमदनी हो सकती है.
इसी तरह कुछ इक्विटी म्यूचुअल फंड भी डिविडेंड का ऑप्शन देते हैं. हालांकि शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव होता है, इसलिए बिना जानकारी के निवेश करना ठीक नहीं। बुनियादी जानकारी लेना, कंपनी की स्थिति समझना और जल्दबाजी से बचना जरूरी है.
नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) लंबे समय के निवेश के लिए जाने जाते हैं. इनमें निवेश करने से भविष्य के लिए एक बड़ा फंड तैयार होता है. साथ ही टैक्स में भी कुछ राहत मिलती है.
PPF में पैसा धीरे-धीरे बढ़ता है और जोखिम कम होता है. वहीं NPS रिटायरमेंट के बाद नियमित पेंशन का आधार बन सकता है. जो लोग अभी से अपने बुढ़ापे की चिंता करना चाहते हैं, उनके लिए ये विकल्प उपयोगी हैं.
सिर्फ निवेश करना ही काफी नहीं है, खर्चों पर भी नजर रखना उतना ही जरूरी है. बिना योजना के किया गया खर्च बचत को नुकसान पहुंचा सकता है. महीने का बजट बनाना, गैर-जरूरी खर्च कम करना और नियमित निवेश की आदत डालना लंबे समय में फर्क दिखाता है.
हर निवेश को एक ही जगह न रखकर अलग-अलग विकल्पों में बांटना समझदारी होती है. इससे जोखिम भी कम होता है और आमदनी के कई रास्ते खुलते हैं.
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