राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने अपने संगठन में एक बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है. 100 साल पूरे होने के बाद संघ अब अपनी कार्यप्रणाली को और आसान, असरदार और जमीनी स्तर तक मजबूत बनाने की दिशा में कदम उठा रहा है. इसके तहत अब प्रांत प्रचारक की व्यवस्था खत्म होगी और उनकी जगह संभाग प्रचारक को जिम्मेदारी दी जाएगी.
पहले प्रांत प्रचारक का क्षेत्र बहुत बड़ा होता था. इससे कई बार जमीनी स्तर तक काम देखना और निगरानी करना मुश्किल हो जाता था. नई योजना के अनुसार, दो कमिश्नरी को मिलाकर एक संभाग बनाया जाएगा, और उसके लिए संभाग प्रचारक जिम्मेदार होंगे. इससे क्षेत्र का आकार छोटा होगा और काम आसान तरीके से संभाला जा सकेगा. संघ के वरिष्ठ प्रचारकों के अनुसार यह बदलाव 2026-27 से लागू हो सकता है. इससे संगठन के कामकाज में बेहतर समन्वय और सटीक निगरानी संभव होगी.
अब संघ ने क्षेत्र प्रचारक की व्यवस्था भी खत्म कर दी है. उनकी जगह हर राज्य में एक राज्य प्रचारक होंगे. पहले एक क्षेत्र प्रचारक कई प्रांतों का काम संभालता था, जिससे जिम्मेदारी बहुत बड़ी हो जाती थी. अब राज्य प्रचारक सीधे पूरे राज्य का काम देखेंगे, जिससे समन्वय और निगरानी आसान और असरदार होगी.
उत्तर प्रदेश में पहले दो क्षेत्र प्रचारक होते थे:
नई व्यवस्था में अब यूपी के लिए एक राज्य प्रचारक होगा और उत्तराखंड के लिए अलग राज्य प्रचारक. इससे पूरे राज्य का समन्वय आसान होगा और संगठन के कामकाज पर निगरानी बेहतर होगी.
राजस्थान अब तक अलग प्रांत के रूप में काम करता था. नई योजना के तहत इसे उत्तर क्षेत्र में जोड़ने की तैयारी है.
इससे संगठन के कामकाज में संतुलन और बेहतर नियंत्रण आएगा.
प्रांत की जगह संभाग और राज्य प्रचारक होने से निचले स्तर तक निगरानी और समन्वय और मजबूत होगा.
इस नई व्यवस्था से संघ की गतिविधियाँ जमीनी स्तर तक आसान और असरदार होंगी.
RSS का यह बदलाव संगठन की कार्यकुशलता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम है. 100 साल पूरे होने के बाद संघ अब अपने संगठन को नई सदी की जरूरतों के अनुसार ढाल रहा है. प्रांत की जगह संभाग, क्षेत्र प्रचारक की जगह राज्य प्रचारक और राजस्थान को उत्तर क्षेत्र में जोड़ने जैसे बदलाव संघ को ज्यादा लचीला और प्रभावी संगठन बनाने की दिशा में एक रणनीतिक कदम साबित होंगे.
इस बदलाव से संघ को न केवल अंदरूनी समन्वय और निगरानी बेहतर बनाने में मदद मिलेगी, बल्कि नए प्रचारक प्रणाली से जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की भागीदारी और जवाबदेही भी बढ़ेगी. छोटे संभाग और राज्य स्तर के प्रचारक क्षेत्र का अधिक ध्यान रख पाएंगे, जिससे प्रशिक्षण, कार्यक्रम और समाज सेवा गतिविधियाँ और प्रभावी ढंग से संचालित की जा सकेंगी. यह कदम संघ की रणनीति को भविष्य में और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा.
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