PSLV-C62 Fail: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो को साल 2026 की शुरुआत में एक बड़ा झटका लगा है. इसरो का पीएसएलवी रॉकेट अपने मिशन को पूरा नहीं कर पाया. ये रॉकेट आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया गया था. शुरुआत अच्छी रही, लेकिन बाद में तकनीकी खराबी आ गई.
पीएसएलवी रॉकेट सुबह 10 बजकर 17 मिनट पर उड़ान भर सका. पहले और दूसरे चरण में रॉकेट ने सही तरीके से काम किया. वैज्ञानिकों को कोई परेशानी नजर नहीं आई. लोग टीवी और मोबाइल पर लाइव देख रहे थे.
रॉकेट के तीसरे चरण में पहुंचते ही समस्या शुरू हुई. कुछ समय बाद रॉकेट से संपर्क टूट गया. इसरो को मिलने वाला डेटा बंद हो गया. इससे साफ हो गया कि रॉकेट अपनी तय ऊंचाई तक नहीं पहुंच सका.
इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने बताया कि तीसरे चरण के अंत में रॉकेट का संतुलन बिगड़ गया था. रॉकेट अपने रास्ते से हट गया, इसलिए मिशन पूरा नहीं हो सका. उन्होंने कहा कि पूरी जांच की जा रही है.
इस मिशन में एक खास सैटेलाइट भेजा जाना था, जिसका नाम ईओएस-एन1 (अन्वेषा) था. ये सैटेलाइट देश की सुरक्षा और समुद्री इलाकों पर नजर रखने के लिए बनाया गया था. इसके साथ 15 छोटे सैटेलाइट भी भेजे जा रहे थे. ये सभी सैटेलाइट अब नष्ट हो गए हैं.
ये दूसरी बार है जब पीएसएलवी के तीसरे चरण में समस्या आई है. अगस्त 2025 में भी इसी तरह की खराबी के कारण एक सैटेलाइट खो गया था. लगातार दो बार आई इस समस्या से चिंता बढ़ गई है.
पीएसएलवी अब तक इसरो का भरोसेमंद रॉकेट रहा है. इसने कई बड़े और सफल मिशन पूरे किए हैं. चंद्रयान-1 और आदित्य-एल1 जैसे मिशन इसी रॉकेट से भेजे गए थे. इसलिए इस असफलता को बहुत गंभीर माना जा रहा है.
पीएसएलवी से कई निजी और विदेशी सैटेलाइट भी भेजे जाते हैं. इस मिशन के असफल होने से निजी अंतरिक्ष कंपनियों को नुकसान हो सकता है. इससे आने वाले मिशनों में देरी भी हो सकती है.
इसरो ने कहा है कि रॉकेट की खराबी को ठीक किया जाएगा. वैज्ञानिक हर पहलू की जांच कर रहे हैं. जरूरी सुधार करने के बाद आगे के मिशन फिर से शुरू किए जाएंगे. इसरो को भरोसा है कि आने वाले समय में मिशन सफल होंगे.
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