अगर आप इंटरनेट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी खबरें पढ़ते रहते हैं, तो आपने Google के Nano Banana AI मॉडल का नाम जरूर सुना होगा. नाम सुनते ही लोगों के मन में ये सवाल आता है कि आखिर इतना अलग और अजीब नाम क्यों रखा गया. इसकी वजह जितनी अनोखी है, उतनी ही दिलचस्प भी.
ये कहानी जुलाई 2024 की है, जब Google को अपने इमेज AI मॉडल को एक पब्लिक प्लेटफॉर्म पर सबमिट करना था. मॉडल का तकनीकी नाम Gemini 2.5 Flash Image था, लेकिन कंपनी चाहती थी कि इसका एक आसान और याद रहने वाला नाम भी हो. इसी दौरान रात करीब ढाई बजे प्रोडक्ट मैनेजर नैना रायसिंघानी को अचानक मैसेज आया कि तुरंत कोई नाम सुझाया जाए.
नैना रायसिंघानी ने बिना ज्यादा सोचे “Nano Banana” नाम सुझा दिया. ये नाम उनके खुद के निकनेम से जुड़ा हुआ था. सुनने में भले यह नाम थोड़ा अजीब लगे, लेकिन Google की टीम को यह अलग और याद रहने वाला लगा, इसलिए इसे तुरंत मंजूरी मिल गई.
निकनेम से बना AI मॉडल का नाम
दरअसल Nano Banana नाम नैना रायसिंघानी के दोस्तों द्वारा दिए गए निकनेम्स से बना है. कुछ दोस्त उन्हें “Naina Banana” कहते हैं, जबकि कुछ “Nano” बुलाते हैं, क्योंकि वो कद में छोटी हैं और टेक्नोलॉजी से खास लगाव रखती हैं. इन दोनों शब्दों को मिलाकर Nano Banana नाम बना.
अगस्त 2024 में जब यह मॉडल LMArena प्लेटफॉर्म पर सामने आया, तो लोगों ने इसकी इमेज एडिटिंग क्षमता को काफी पसंद किया. साथ ही इसका अनोखा नाम भी चर्चा का विषय बन गया. देखते ही देखते Nano Banana इंटरनेट पर पहचाना जाने लगा.
नैना रायसिंघानी Google में सीनियर प्रोडक्ट मैनेजर हैं. उनका जन्म पाकिस्तान के कराची में हुआ था. उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिलवेनिया से कंप्यूटर साइंस में मास्टर्स की पढ़ाई की है. टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में उनकी मेहनत और सोच ने उन्हें खास पहचान दिलाई है.
बाद में जब Google ने अपने इमेज AI मॉडल को और बेहतर किया और Gemini 3 Pro Image लॉन्च किया, तब भी कंपनी ने Nano Banana नाम को बनाए रखा. नए वर्जन को Nano Banana Pro कहा गया. यह मॉडल पहले से ज्यादा बेहतर और ताकतवर बताया जा रहा है.
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