महाराष्ट्र की सबसे अमीर नगर निगम बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। इस जीत के बाद बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं में जश्न का माहौल है। अभिनेता से सांसद बनीं कंगना रनौत ने भी इस जीत पर खुशी जताई और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को बधाई दी।
बीएमसी चुनाव का यह नतीजा कंगना रनौत के लिए भावनात्मक रूप से भी खास माना जा रहा है। साल 2020 में, जब मुंबई में शिवसेना की सरकार थी, तब बीएमसी ने कंगना के मुंबई स्थित बंगले से जुड़े ऑफिस को तोड़ दिया था। उस समय यह मामला काफी विवादों में रहा था। बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट ने बीएमसी की इस कार्रवाई को “कानूनन दुर्भावनापूर्ण” बताया था।
अब जब शिवसेना (उद्धव गुट) का बीएमसी से नियंत्रण खत्म हुआ है, तो कंगना ने इसे न्याय की जीत बताया।
एनडीटीवी से बातचीत में कंगना रनौत ने कहा,“मैं बीजेपी की इस शानदार जीत से बेहद खुश हूं। प्रधानमंत्री मोदी जी, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस जी और महाराष्ट्र बीजेपी को इस ऐतिहासिक भगवा जीत के लिए बधाई देती हूं।”
उन्होंने आगे कहा,“जिन लोगों ने मुझे गालियां दीं, मेरा घर तोड़ा, मुझे महाराष्ट्र छोड़ने की धमकी दी आज वही लोग सत्ता से बाहर हो गए हैं। आज महाराष्ट्र ने उन्हें छोड़ दिया है।”
कंगना ने यह भी कहा कि जनता ने उन लोगों को जवाब दिया है जो महिलाओं के खिलाफ सोच रखते हैं और राजनीति में दबंगई करते हैं।
अब तक सामने आए रुझानों के मुताबिक, मुंबई की 227 सीटों में से 210 सीटों के रुझान आ चुके हैं। बीजेपी 90 सीटों पर आगे है, एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना 28 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है और अजित पवार की एनसीपी सिर्फ 3 सीटों पर आगे है।
वहीं विपक्ष में, उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना 57 सीटों पर, एमएनएस 9 सीटों पर और कांग्रेस 15 सीटों पर आगे है। इन आंकड़ों से साफ है कि बीएमसी पर शिवसेना (UBT) का लंबे समय से चला आ रहा दबदबा खत्म हो गया है।
पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम चुनावों के नतीजों ने भी बड़ा राजनीतिक संकेत दिया है। कभी शहरी इलाकों में मजबूत माने जाने वाला पवार परिवार का प्रभाव अब कमजोर होता दिख रहा है। शरद पवार और अजित पवार दोनों गुटों की रणनीति भी मतदाताओं को एकजुट नहीं कर सकी।
बीएमसी चुनाव के नतीजे यह साफ दिखाते हैं कि महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव आया है। बीजेपी ने शहरी इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत की है, जबकि शिवसेना और एनसीपी को बड़ा झटका लगा है। कंगना रनौत के लिए यह जीत सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि व्यक्तिगत तौर पर भी “न्याय” की तरह है।
Copyright © 2026 The Samachaar
