हिडमा के खात्मे के बाद सुरक्षाबलों ने नक्सलवाद के खिलाफ एक और बड़ी सफलता दर्ज की है. ओडिशा के कंधमाल जिले में हुए बड़े एनकाउंटर में शीर्ष नक्सली नेता गणेश उइके समेत चार नक्सलियों को मार गिराया गया है. यह कार्रवाई नक्सल नेटवर्क के लिए गहरा झटका मानी जा रही है, क्योंकि गणेश उइके माओवादी संगठन की सेंट्रल कमेटी का सदस्य था और ओडिशा में नक्सली गतिविधियों का संचालन कर रहा था.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस ऑपरेशन को नक्सल-मुक्त भारत की दिशा में “मील का पत्थर” बताया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि कंधमाल के जंगलों में हुए इस अभियान में सेंट्रल कमेटी सदस्य गणेश उइके सहित कुल छह नक्सली ढेर किए गए हैं. शाह ने दोहराया कि केंद्र सरकार 31 मार्च 2026 से पहले देश से नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है.
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, गणेश उइके पर 1.1 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था. वह लंबे समय से ओडिशा में प्रतिबंधित माओवादी संगठन का शीर्ष चेहरा बना हुआ था. 69 वर्षीय उइके कई उपनामों से जाना जाता था, जिनमें पक्का हनुमंतु, राजेश तिवारी, चमरू और रूपा शामिल हैं. वह तेलंगाना के नलगोंडा जिले का रहने वाला था और वर्षों से भूमिगत रहकर नक्सली नेटवर्क को मजबूत कर रहा था.
चाकपाड़ थाना क्षेत्र के जंगलों में हुई इस मुठभेड़ में दो महिला नक्सलियों के मारे जाने की भी पुष्टि हुई है. अन्य मारे गए नक्सलियों की पहचान की प्रक्रिया जारी है. अधिकारियों का कहना है कि यह मुठभेड़ बेहद रणनीतिक थी, क्योंकि इसमें नक्सल संगठन की कमान संभाल रहे नेता को निशाना बनाया गया.
ओडिशा के डीजीपी योगेश बहादुर खुराना ने बताया कि गंजम जिले की सीमा से सटे इलाकों में एक बड़ा जॉइंट एंटी-नक्सल ऑपरेशन चल रहा है. गणेश उइके की मौत से ओडिशा में नक्सलवाद की रीढ़ टूट गई है. सुरक्षा बलों का मानना है कि इससे राज्य में नक्सली गतिविधियां काफी हद तक कमजोर होंगी.
अधिकारियों के अनुसार, हिडमा के बाद गणेश उइके का खात्मा नक्सल आंदोलन के लिए बड़ा झटका है. इसका असर सिर्फ ओडिशा ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों पर भी पड़ेगा. सुरक्षा बल और राज्य पुलिस केंद्र सरकार की तय समयसीमा के भीतर नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के लक्ष्य पर पूरी ताकत से आगे बढ़ रहे हैं.
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