पंजाब की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। आय से अधिक संपत्ति के मामले में उन्हें जमानत मिल गई है, जिसके बाद अब उनके जेल से बाहर आने का रास्ता लगभग साफ माना जा रहा है।
मजीठिया करीब सात महीने से जेल में बंद थे। लंबे समय से उनकी जमानत को लेकर राजनीतिक और कानूनी चर्चाएं चल रही थीं। अब सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को अकाली दल के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है।
बिक्रम मजीठिया पंजाब की राजनीति में कोई छोटा नाम नहीं हैं। खासतौर पर माझा क्षेत्र और जाट सिख बहुल इलाकों में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। अकाली दल के कई कार्यकर्ता और नेता मानते हैं कि मजीठिया की जेल से रिहाई से पार्टी को 2027 के विधानसभा चुनाव में सीधा फायदा हो सकता है।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, मजीठिया की सक्रिय राजनीति में वापसी से अकाली दल को फिर से जमीनी स्तर पर मजबूती मिल सकती है, जो पिछले कुछ सालों में कमजोर पड़ी थी।
मजीठिया को पहले ही एनडीपीएस (ड्रग्स) मामले में जमानत मिल चुकी थी। अब सुप्रीम कोर्ट से आय से अधिक संपत्ति केस में भी राहत मिलने के बाद उनके जेल में बने रहने का कोई बड़ा कानूनी कारण फिलहाल नजर नहीं आता।
हालांकि, कानूनी प्रक्रिया पूरी होने में थोड़ा समय लग सकता है। जमानत मिलने के बाद बॉन्ड भरना, अदालत से रिहाई आदेश जारी होना और जेल प्रशासन की औपचारिकताएं पूरी करना जरूरी होता है।
फिलहाल उनकी तुरंत रिहाई संभव नहीं है। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट का आदेश शाम को आया और उसकी आधिकारिक प्रति अभी अपडेट नहीं हुई है। साथ ही अदालत की कार्यवाही भी खत्म हो चुकी थी।
ऐसे में संभावना है कि कल बॉन्ड भरे जाएंगे और उसके बाद ही मजीठिया की जेल से रिहाई का आदेश जारी हो पाएगा। आमतौर पर यह प्रक्रिया एक दिन का समय ले सकती है।
यह मामला अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। पंजाब सतर्कता ब्यूरो इस केस की जांच कर रहा है। मोहाली कोर्ट में इस मामले में करीब 40 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।
सतर्कता विभाग ने मजीठिया के खिलाफ 195 आधिकारिक गवाह पेश किए हैं। इनमें पंजाब पुलिस के पूर्व अधिकारी, मजीठिया के करीबी लोग और यहां तक कि ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) के पूर्व अधिकारी भी शामिल हैं। इसके अलावा, एक अन्य आरोपी हरप्रीत सिंह गुलाटी को भी गिरफ्तार किया गया है, जिसके खिलाफ अलग से चार्जशीट दाखिल हो चुकी है।
जब सतर्कता विभाग मजीठिया को गिरफ्तार करने अमृतसर पहुंचा था, उस दौरान सरकारी काम में बाधा डालने का एक अलग मामला भी दर्ज किया गया था। इस केस में उन्हें जमानत मिली है या नहीं, यह स्थिति अभी साफ नहीं है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि भविष्य में किसी अन्य मामले में उन्हें नामजद किया जा सकता है, हालांकि फिलहाल इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
जमानत मिलने से ठीक पहले राधा स्वामी सत्संग ब्यास के प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों ने जेल में मजीठिया से मुलाकात की। इस मुलाकात को राजनीतिक दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा है।
डेरा प्रमुख ने मजीठिया पर लगे आरोपों को झूठा बताया। पंजाब में डेरा ब्यास का बड़ा प्रभाव माना जाता है, खासकर चुनावों के समय। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुलाकात डेरा ब्यास और शिरोमणि अकाली दल के बीच नजदीकी बढ़ने का संकेत हो सकती है। इससे 2027 के चुनावों में समर्थन या गठबंधन की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।
अगर बिक्रम मजीठिया पूरी तरह सक्रिय राजनीति में लौटते हैं, तो इसका असर सिर्फ अकाली दल पर ही नहीं, बल्कि पूरी पंजाब की राजनीति पर पड़ेगा। विपक्षी दलों की रणनीति भी इस बदलाव के बाद बदली हुई नजर आ सकती है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि मजीठिया कब जेल से बाहर आते हैं और बाहर आते ही उनकी राजनीतिक गतिविधियां किस दिशा में जाती हैं।
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