शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के अध्यक्ष सिमरनजीत सिंह मान के पोते गोविंद सिंह संधू ने आज श्री अकाल तख्त साहिब पहुंचकर सिख समुदाय से माफी मांगी। उन्होंने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार सिंह साहिब ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज को एक लिखित माफीनामा सौंपा और कहा कि वे सिख मर्यादा और शिष्टाचार का पूरा सम्मान करते हैं।
गोविंद सिंह संधू ने स्पष्ट किया कि उनसे जो भी गलती हुई, वह अनजाने में हुई और उसका किसी भी तरह से सिख धर्म की मर्यादा या गुरु साहिब की गरिमा को ठेस पहुंचाने का कोई इरादा नहीं था।
यह मामला हाल ही में हुए एक शादी समारोह से जुड़ा है। समारोह के दौरान छतरियों को लटकाने और चोरी से जुड़ी घटना को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। इस घटना से जुड़ी एक तस्वीर को लेकर अकाली दल के एक नेता ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा की थी, जिसके बाद सिख संगत में नाराजगी देखने को मिली।
इस पूरे घटनाक्रम को सिख मर्यादा से जोड़कर देखा गया और कई लोगों ने इसे अनुचित बताया। विवाद बढ़ने के बाद गोविंद सिंह संधू ने स्वयं अकाल तख्त साहिब पहुंचकर अपनी बात रखने का फैसला किया।
अकाल तख्त साहिब में पेश होकर गोविंद सिंह संधू ने कहा कि वे सिख शिष्टाचार और मर्यादा को सर्वोपरि मानते हैं। उन्होंने कहा कि इस घटना के लिए वे पूरे सिख समुदाय से तहे दिल से माफी मांगते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरे मामले में पहले से कोई परामर्श नहीं किया गया, जिसकी वजह से गलतफहमी पैदा हुई। अगर समय रहते सलाह ली जाती, तो यह स्थिति उत्पन्न ही नहीं होती।
गोविंद सिंह संधू ने स्वीकार किया कि इस घटना के बाद पार्टी के कई नेता और सहयोगी उनसे नाराज हैं। उन्होंने कहा कि यह नाराजगी स्वाभाविक है और वे सभी की भावनाओं का सम्मान करते हैं।
उन्होंने दोहराया कि वे सभी से दिल से माफी मांगते हैं और उन्हें विश्वास है कि गुरु महाराज क्षमाशील हैं। सच्चे मन से मांगी गई माफी को गुरु साहिब अवश्य स्वीकार करेंगे।
अपने बयान में गोविंद सिंह संधू ने साफ कहा कि उनका श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की गरिमा या गुरु मर्यादा को ठेस पहुंचाने का कोई उद्देश्य नहीं था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिस समय की बात हो रही है, उस रात्रि जुलूस के दौरान गुरु महाराज उपस्थित नहीं थे।
उन्होंने कहा कि इस संबंध में मौजूद सभी वीडियो और तस्वीरें मीडिया के सामने रखी जाएंगी, ताकि किसी भी तरह का भ्रम या संदेह न रहे।
गोविंद सिंह संधू ने यह भी कहा कि इस मामले में ‘चौर’ शब्द का प्रयोग किया गया, लेकिन चौर साहिब या छतर साहिब जैसे पवित्र शब्दों की गलत व्याख्या करना उचित नहीं है। गुरु साहिब के दरबार में हमेशा शालीनता और मर्यादा का पालन किया गया है।
अंत में गोविंद सिंह संधू ने कहा कि यह घटना उनके लिए एक बड़ी सीख है। आगे से कोई भी निर्णय पूरे परामर्श, सोच-विचार और सिख मर्यादा के अनुसार ही लिया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भविष्य में ऐसी कोई गलती दोबारा नहीं होगी और वे हमेशा गुरु मर्यादा का पालन करेंगे।
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