नगर निगम में 135 करोड़ रुपये के विकास कार्यों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. आरोप है कि टेंडरों की आड़ में फर्जीवाड़ा किया गया और शर्तें इस तरह बनाई गईं कि फायदा केवल चुनिंदा ठेकेदारों को मिले. मामला अब विजिलेंस विभाग तक पहुंच चुका है और जांच की मांग तेज हो गई है.
शिकायत में कहा गया है कि 5 से 13 करोड़ रुपये तक के कामों को ग्रुप बनाकर जारी किया गया. आरोप है कि एस.ई. शाम लाल गुप्ता और एक्सियन अरविंद ने टेंडर की शर्तें ऐसी रखीं जिन्हें कुछ खास ठेकेदार ही पूरा कर सकें.
बताया जा रहा है कि बड़े ठेकेदारों ने आपस में समझौता कर टेंडर बांट लिए और बहुत कम दर (लैस) डालकर काम हासिल कर लिया. जो ठेकेदार ज्यादा प्रतिस्पर्धी दर लेकर आए, उन्हें तकनीकी शर्तें पूरी न करने का हवाला देकर बाहर कर दिया गया.
एक ठेकेदार ने लीगल नोटिस भेजा है, जबकि दूसरे ने एफिडेविट के जरिए विजिलेंस को शिकायत दी है. इसमें आरोप लगाया गया है कि टेंडरों को जानबूझकर दो बार लंबित रखा गया, ताकि पहले से बनी ‘सेटिंग’ को पूरा किया जा सके.
शिकायत में यह भी कहा गया है कि शर्तों में मनमाने बदलाव कर बड़े ठेकेदारों के ‘पूल’ को फायदा पहुंचाया गया.
एक अन्य शिकायत में दावा किया गया है कि फिरोजपुर रोड स्थित एक होटल में ठेकेदारों के बीच टेंडर बांटने की बैठक हुई. आरोप है कि नगर निगम की बी एंड आर शाखा के अधिकारी 5 से 7 प्रतिशत कमीशन मांग रहे थे.
सड़क निर्माण जैसे काम, जो आमतौर पर 35-40 प्रतिशत कम दर पर दिए जाते हैं, उन्हें कथित तौर पर सिर्फ 5 प्रतिशत कम दर पर अलॉट किया गया. इससे सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान होने की आशंका जताई गई है. शिकायतकर्ता ने कॉल डिटेल और लोकेशन जांच की मांग भी की है ताकि सच्चाई सामने आ सके.
यह पहली बार नहीं है जब टेंडरों को लेकर सवाल उठे हों. इससे पहले रोज गार्डन के काम में 10 प्रतिशत कमीशन मांगने के आरोप में एक एस.ई. की गिरफ्तारी भी हो चुकी है.
इसके बावजूद, आरोप है कि व्यवस्था में कोई खास बदलाव नहीं आया. अब देखना होगा कि विजिलेंस जांच में क्या सामने आता है और क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होती है.
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