पंजाब में कई सालों से ठेके पर काम कर रहे चौकीदारों को बड़ी राहत मिली है. पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि ऐसे कर्मचारियों को अब पक्का किया जाए. कोर्ट ने कहा कि लंबे समय तक काम लेने के बाद भी कर्मचारियों को अस्थायी रखना गलत है और यह बराबरी के अधिकार के खिलाफ है.
कोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित विभागों को साफ निर्देश दिए हैं कि आदेश मिलने के 6 हफ्तों के अंदर सभी याचिकाकर्ताओं को नियमित किया जाए. अगर तय समय में ऐसा नहीं किया गया, तो कर्मचारी अपने आप पक्के माने जाएंगे. कोर्ट ने यह भी कहा कि कर्मचारियों की पहले की सेवा अवधि को भी जोड़ा जाए और उन्हें नियमित कर्मचारियों की तरह सभी लाभ दिए जाएं.
याचिका देने वाले कर्मचारियों ने बताया कि वे साल 2008 से अलग-अलग सरकारी विभागों में चौकीदार के रूप में काम कर रहे हैं. काम तो उनसे नियमित कर्मचारियों जैसा ही लिया जाता था, लेकिन उन्हें ठेकेदार के जरिए रखा गया था. उन्होंने मांग की थी कि उन्हें समान काम के लिए समान वेतन और पक्का दर्जा दिया जाए.
कोर्ट में यह बात भी सामने आई कि विभाग ठेकेदार को हर कर्मचारी के लिए लगभग 14,000 रुपये देता था, लेकिन कर्मचारियों को इससे काफी कम पैसा मिलता था. इससे वे न्यूनतम मजदूरी से भी कम पर काम करने को मजबूर थे. अदालत ने इसे गलत बताया और कहा कि सरकार एक जिम्मेदार नियोक्ता है, इसलिए उसे कर्मचारियों के अधिकारों का सम्मान करना चाहिए.
हाई कोर्ट के इस फैसले को बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इससे राज्य में काम कर रहे अन्य आउटसोर्स और अस्थायी कर्मचारियों को भी फायदा मिल सकता है. कोर्ट ने साफ कहा कि अगर कोई कर्मचारी लंबे समय से लगातार काम कर रहा है और उसका काम स्थायी है, तो उसे सिर्फ ठेके पर रखना सही नहीं है. यह फैसला कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
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