उत्तर प्रदेश विधानमंडल के बजट सत्र में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के सम्मान का विषय प्रमुखता से उठाया. 16 फरवरी 2026 को विधान परिषद में उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् देश की आन-बान-शान का प्रतीक है और इसका अपमान संविधान की भावना के खिलाफ है. उनके अनुसार, जो व्यक्ति भारत में रहकर राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान नहीं करता, वह संविधान की मर्यादा का उल्लंघन करता है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि हर नागरिक का कर्तव्य है कि वो राष्ट्रीय प्रतीकों और संवैधानिक पदों का आदर करे. उन्होंने विपक्ष के कुछ व्यवहारों की आलोचना करते हुए कहा कि राज्यपाल जैसे संवैधानिक प्रमुख के प्रति असम्मान लोकतांत्रिक परंपराओं को कमजोर करता है. उन्होंने यह भी कहा कि राज्यपाल का अभिभाषण सरकार की उपलब्धियों और आगे की योजनाओं का दस्तावेज होता है, जिस पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए.
सीएम योगी ने पिछले नौ वर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश ने अव्यवस्था से कानून के राज तक का सफर तय किया है. उनके अनुसार, पहले अपराध और दंगों की घटनाएं आम थीं और पुलिस का मनोबल कमजोर था. उन्होंने दावा किया कि अब प्रदेश में कानून व्यवस्था मजबूत हुई है और विकास के लिए सुरक्षित माहौल बना है.
उन्होंने यह भी कहा कि पहले कुछ जिलों में माफिया का दबदबा था, जबकि अब निवेश और रोजगार के अवसर बढ़े हैं. सरकार ने सामाजिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता पर भी जोर दिया है.
मुख्यमंत्री ने प्रयागराज के संगम का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे वहां तीन नदियां मिलती हैं, वैसे ही प्रदेश में तकनीक, विश्वास और बदलाव साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं. उन्होंने एआई इम्पैक्ट समिट का जिक्र करते हुए कहा कि देश नई तकनीक और योजनाओं के साथ आगे बढ़ रहा है.
उनके अनुसार, प्रदेश में अब शांति का माहौल है और त्योहारों को उत्सव के रूप में मनाया जा रहा है.
मुख्यमंत्री ने महाराजा सुहेलदेव और अहिल्याबाई होल्कर का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश अपनी सांस्कृतिक धरोहर को सम्मान दे रहा है. उन्होंने कहा कि नए उत्तर प्रदेश में विभाजनकारी सोच को जगह नहीं मिलेगी.
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि राम मंदिर अयोध्या का निर्माण हो चुका है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं. साथ ही उन्होंने काशी विश्वनाथ धाम के विकास का भी उल्लेख किया.
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 में प्रदेश की अर्थव्यवस्था लगभग 13 लाख करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर 36 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है. उन्होंने दावा किया कि सरकार ने कोई नया कर नहीं लगाया, बल्कि कर चोरी रोककर राजस्व बढ़ाया है.
अंत में उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की पहचान अब शांति, विकास और सांस्कृतिक आयोजनों से बन रही है, जबकि पहले इसे पिछड़े राज्य के रूप में देखा जाता था.
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