मॉडल टाउन स्थित गुरुद्वारा सिंह सभा के बाहर आम आदमी पार्टी के नेता लक्की ओबरॉय की हत्या के मामले में एक नया मोड़ सामने आया है. इस केस में नामजद दलवीर सिंह उर्फ दलबीरा ने जेल से मीडिया के जरिए अपनी बेगुनाही का दावा किया है. उसने कहा कि उसका इस वारदात से कोई लेना-देना नहीं है और उसे साजिश के तहत फंसाया गया है.
दलबीरा ने एक इंटरव्यू में कहा कि उसकी लक्की ओबरॉय से न तो कोई निजी रंजिश थी और न ही किसी तरह का लेन-देन. उसका दावा है कि वह पिछले दो वर्षों से विदेश में रह रहा था और इस दौरान उसका ओबरॉय से कोई संपर्क नहीं रहा. उसने कहा कि लक्की से उसकी केवल एक बार मुलाकात हुई थी, इसके बाद कभी बातचीत नहीं हुई.
दलबीरा के अनुसार, असल विवाद कॉलेज प्रधानगी की राजनीति से जुड़ा था. उसने बताया कि पहले जोगा फोलड़ीवाल ने खालसा कॉलेज में प्रधानगी संभाली थी और बाद में लक्की ओबरॉय इस पद पर आए. प्रधान बनने के बाद लक्की द्वारा दिए गए कुछ बयानों से तनाव बढ़ा. दलबीरा का आरोप है कि उसी रंजिश के चलते हालात बिगड़े.
उसने यह भी कहा कि उसका झगड़ा शशि शर्मा उर्फ “बोदी वाले” से था, न कि लक्की ओबरॉय से. उसके मुताबिक, बोदी वाले के कहने पर ही उसे इस मामले में झूठा फंसाया गया.
दलवीर ने यह भी स्पष्ट किया कि वह जोगा फोलड़ीवाल को जानता तक नहीं. उसका कहना है कि केवल एक बार होशियारपुर जेल में मुलाकात हुई थी, इसके बाद न कोई फोन कॉल हुई और न कोई संपर्क.
उसने आरोप लगाया कि कुछ समय पहले वह बोदी वाले के दफ्तर में विरोध दर्ज कराने गया था, जहां कहासुनी और हाथापाई हुई. इसके बाद दफ्तर में बाउंसर रखे गए.
वहीं पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है. अधिकारियों के अनुसार, सभी तथ्यों और सबूतों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी. दलबीरा के बयानों पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
यह मामला अब कई सवाल खड़े कर रहा है-क्या यह व्यक्तिगत रंजिश थी या कॉलेज राजनीति का नतीजा? जवाब जांच पूरी होने के बाद ही साफ हो पाएगा.
Copyright © 2026 The Samachaar
