दिल्ली की राजनीति में चर्चित आतिशी वीडियो मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है. इस प्रकरण में दिल्ली विधानसभा ने कड़ा रुख अपनाते हुए पंजाब के वरिष्ठ अधिकारियों को दोबारा नोटिस जारी किया है. जानकारी के अनुसार, जालंधर के पुलिस कमिश्नर से 20 फरवरी तक जवाब मांगा गया है. तय समय में स्पष्टीकरण न मिलने पर विशेषाधिकार हनन और अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की चेतावनी भी दी गई है.
दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने इससे पहले 5 फरवरी 2026 को पत्र जारी कर 12 फरवरी तक जवाब देने को कहा था. लेकिन निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बावजूद कोई उत्तर प्राप्त नहीं हुआ. इसके बाद 13 फरवरी को दोबारा पत्र भेजा गया, जिसमें पंजाब के डीजीपी गौरव यादव, जालंधर की पुलिस कमिश्नर धनप्रीत कौर और गृह विभाग के अतिरिक्त सचिव से जवाब मांगा गया है.
पत्र में स्पष्ट किया गया है कि यदि 20 फरवरी तक संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, तो इसे गंभीरता से लेते हुए विशेषाधिकार समिति आगे की कार्रवाई पर विचार करेगी.
यह मामला दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी मार्लेना से जुड़ा है. उन पर सदन की कार्यवाही के दौरान सिख गुरुओं को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगा था. इस बयान से संबंधित एक वीडियो सामने आया, जिसे लेकर शिकायतें दर्ज कराई गईं.
आम आदमी पार्टी के नेता इकबाल सिंह बग्गी की शिकायत पर कांग्रेस नेताओं परगट सिंह और सुखपाल खैहरा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई. आरोप था कि वीडियो को आगे प्रसारित किया गया.
पुलिस ने वीडियो की फॉरेंसिक जांच कराई, जिसमें कथित तौर पर छेड़छाड़ की बात सामने आई. इसके बाद मनजिंदर सिंह सिरसा और कपिल मिश्रा के नाम भी प्राथमिकी में जोड़े गए. मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया और विभिन्न दलों के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए.
दिल्ली विधानसभा सचिवालय का कहना है कि यह मामला विशेषाधिकार से जुड़ा है, इसलिए संबंधित अधिकारियों का जवाब बेहद जरूरी है. यदि समय पर प्रतिक्रिया नहीं मिलती, तो इसे सदन की अवमानना माना जा सकता है. फिलहाल, जांच प्रक्रिया जारी है और सभी संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया गया है. आने वाले दिनों में इस मामले की दिशा काफी हद तक अधिकारियों के जवाब और जांच रिपोर्ट पर निर्भर करेगी.
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