Bangladesh Election 2026: बांग्लादेश में हाल ही में हुए चुनाव और जनमत संग्रह ने देश की राजनीति को एक नई दिशा दे दी है. इस चुनाव में तारिक रहमान की पार्टी को बड़ी जीत मिली है. वहीं दूसरी ओर पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का प्रभाव भी कई इलाकों में साफ दिखाई दिया. खास बात ये रही कि जिन क्षेत्रों को शेख हसीना का गढ़ माना जाता है, वहां बड़ी संख्या में 'ना' के पक्ष में वोट पड़े हैं. ये स्थिति तब बनी जब उनकी पार्टी को चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी गई थी.
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार गोपालगंज, चटगांव, बंदरबन, रंगमती और खगराचारी जैसे जिलों में 'ना' के पक्ष में अधिक मतदान हुआ. इन इलाकों को लंबे समय से शेख हसीना और उनकी पार्टी आवामी लीग का मजबूत आधार माना जाता रहा है.
जनमत संग्रह में सरकार ने 'हां' के पक्ष में प्रचार किया था. अंतरिम सरकार का नेतृत्व मोहम्मद यूनुस कर रहे हैं. इसके बावजूद कई इलाकों में मतदाताओं ने 'ना' को चुना, जिसे सरकार के लिए एक झटका माना जा रहा है.
बांग्लादेश चुनाव आयोग के अनुसार गोपालगंज में लगभग 2.5 लाख वोट 'ना' के पक्ष में पड़े, जबकि 'हां' को करीब 1.7 लाख वोट मिले. बंदरबन में 'ना' को 90 हजार से हजार वोट मिले, जबकि 'हां' को लगभग 71 हजार वोट मिले. इसी तरह चटगांव में भी 'ना' को 'हां' से ज्यादा सपोर्ट मिला.
चुनाव आयोग के मुताबिक इस बार लगभग 60 प्रतिशत मतदान हुआ. देश में कुल मतदाताओं की संख्या करीब 12.7 करोड़ बताई गई है. इन आंकड़ों से साफ है कि लोगों ने मतदान में भाग लिया, लेकिन कई क्षेत्रों में सरकार के पक्ष से अलग राय सामने आई.
साल 2024 में सत्ता परिवर्तन के बाद अंतरिम सरकार का गठन हुआ. सरकार बनने के बाद आवामी लीग पर प्रतिबंध लगा दिया गया. इसी कारण पार्टी आम चुनाव में हिस्सा नहीं ले सकी.
शेख हसीना ने पूरी चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि चुनाव निष्पक्ष नहीं थे और उनकी पार्टी को जानबूझकर बाहर रखा गया. उन्होंने ये भी दावा किया कि कई समर्थक मतदान के लिए घरों से नहीं निकले क्योंकि उन्हें अपनी पार्टी का ऑप्शन नहीं मिला.
आवामी लीग के समर्थकों ने 'नो बोट नो वोट' नाम से एक अभियान चलाया. 'बोट' पार्टी का चुनाव चिन्ह था. इस अभियान के तहत समर्थकों ने बैलेट पेपर पर 'नो बोट नो वोट' लिखकर उसे मतपेटी में डाला. इसका असर सबसे ज्यादा गोपालगंज में देखा गया, जो शेख हसीना का गृह क्षेत्र है.
इन चुनाव परिणामों ने ये दिखाया है कि बांग्लादेश की राजनीति अभी भी बदलाव के दौर से गुजर रही है. एक ओर नई सरकार को समर्थन मिला है, तो दूसरी ओर विपक्ष की पकड़ भी कई क्षेत्रों में बनी हुई है. आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि देश की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है.
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