गणतंत्र दिवस के मौके पर पंजाब के अलग-अलग जिलों में किसानों ने ट्रैक्टर मार्च निकालकर केंद्र सरकार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। यह ट्रैक्टर मार्च संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के बैनर तले आयोजित किया गया। किसानों की मुख्य मांग थी कि बिजली (संशोधन) बिल 2025 को तुरंत वापस लिया जाए।
यह दिन किसानों के लिए प्रतीकात्मक रूप से भी अहम रहा, क्योंकि इसी दिन वर्ष 2021 में हजारों किसान दिल्ली के लाल किले तक पहुंचे थे और तीन कृषि कानूनों के खिलाफ बड़ा आंदोलन हुआ था, जो बाद में सरकार को वापस लेने पड़े।
किसानों ने सिर्फ बिजली बिल ही नहीं, बल्कि कई अहम मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया। उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार रहीं-
बिजली (संशोधन) बिल 2025 को वापस लिया जाए
बीज बिल 2025 को रद्द किया जाए
श्रम कानूनों (लेबर कोड) को खत्म किया जाए
मनरेगा (MGNREGA) को पुराने स्वरूप में बहाल किया जाए
फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी दी जाए
किसानों का कहना है कि ये सभी फैसले किसान और मजदूर विरोधी हैं और इससे उनकी आजीविका पर सीधा असर पड़ेगा।
होशियारपुर जिले के मुकेरियां में दोआबा किसान कमेटी की ओर से ट्रैक्टर मार्च निकाला गया। यह मार्च भंगाला के अनाज मंडी से शुरू होकर भंगाला चुंगी, माता रानी चौक, शुगर मिल और एसडीएम कार्यालय तक गया और फिर वापस अनाज मंडी पहुंचकर समाप्त हुआ। इस मार्च का नेतृत्व कमेटी के मुकेरियां यूनिट के अध्यक्ष अवतार सिंह बॉबी ने किया।
दसूहा में भी किसानों ने ट्रैक्टरों के साथ वेरका चौक, एसडीएम चौक, अनाज मंडी, चुंगी चौक और बालागण चौक से होते हुए मियानी रोड स्थित बसरा अस्पताल के पास मार्च समाप्त किया।
गढ़दीवाला में किसानों ने बस स्टैंड और सरहाला मोड़ से होते हुए बहगा गांव के गुरु आसरा घर तक ट्रैक्टर मार्च निकाला।
टांडा में 60 से अधिक ट्रैक्टरों के साथ किसानों ने प्रदर्शन किया। इस मार्च का नेतृत्व दोआबा किसान कमेटी के अध्यक्ष जंगवीर सिंह चौहान ने किया। उन्होंने केंद्र सरकार पर किसान विरोधी नीतियां अपनाने और सहकारी संस्थाओं के निजीकरण का आरोप लगाया।
मोगा जिले के धरमकोट इलाके में भी ट्रैक्टर मार्च निकाला गया, जिसमें भारतीय किसान यूनियन और अन्य किसान संगठनों के नेता शामिल हुए।
किसान नेताओं ने खाद की बढ़ती कीमतों को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि खाद विक्रेताओं की मनमानी पर सरकार को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
अधिकारियों के अनुसार, पंजाब में निकाले गए सभी ट्रैक्टर मार्च पूरी तरह शांतिपूर्ण रहे और कहीं से भी किसी तरह की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। किसानों ने साफ किया कि अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में आंदोलन और तेज किया जाएगा।
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