Punjab Assembly Live Controversy: पंजाब की राजनीति में एक नया विवाद सामने आया है. कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैहरा ने पंजाब विधानसभा की कार्यवाही के लाइव टेलीकास्ट को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए आरोप लगाया कि विधानसभा की जो लाइव कवरेज दिखाई जाती है, वह पूरी तरह पारदर्शी नहीं है. उनके मुताबिक इस प्रसारण को नियंत्रित किया जाता है और दर्शकों को पूरी सच्चाई नहीं दिखाई जाती.
खैहरा का कहना है कि हाल ही में विधानसभा सत्र के दौरान वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने उनके खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया. लेकिन जब यह पूरी घटना हुई, उस समय लाइव टेलीकास्ट में कैमरे का फ्रेम उनकी तरफ नहीं दिखाया गया. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर यह प्रसारण सच में लाइव है, तो विपक्ष के सदस्य कैमरे में क्यों नहीं दिखाई देते.
कांग्रेस विधायक ने इस मामले को लेकर और भी गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका दावा है कि विधानसभा की लाइव कवरेज वास्तव में पूरी तरह ‘लाइव’ नहीं होती. खैहरा के अनुसार यह प्रसारण एक छोटे से कंट्रोल रूम से संचालित किया जाता है, जहां बैठे लोग यह तय करते हैं कि किस वक्त किस दृश्य को दिखाना है. उनका कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया स्क्रिप्ट के अनुसार चलती है और कई बार विपक्ष की गतिविधियों को जानबूझकर कैमरे से दूर रखा जाता है.
Friends,apart from the Badmash type character of @HarpalCheemaMLA i wish to point out the “Fake-Live” coverage of Vidhan Sabha proceedings ! Where is the opposition (myself) in the frame while this fool is attacking me with foul language ?
— Sukhpal Singh Khaira (@SukhpalKhaira) March 12, 2026
In other words i want to tell the… pic.twitter.com/XUo3kLm2J1
खैहरा ने यह भी आरोप लगाया कि विधानसभा की लाइव कवरेज का नियंत्रण कुछ ऐसे लोगों के हाथ में है, जो आम आदमी पार्टी से जुड़े हैं. उनका कहना है कि ये लोग दिल्ली से जुड़े हैं और विधानसभा के अंदर बैठकर लाइव टेलीकास्ट को अपनी मर्जी से नियंत्रित करते हैं.
खैहरा के इन आरोपों के बाद पंजाब की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साध रहे हैं और पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं. हालांकि अब तक इस पूरे मामले पर पंजाब सरकार या आम आदमी पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस आरोप पर क्या जवाब देती है और क्या विधानसभा की लाइव कवरेज को लेकर कोई नई व्यवस्था लागू की जाती है.
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