भारत और पाकिस्तान के बीच मौजूदा तनाव किसी से छिपा नहीं है. हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने दोनों देशों के बीच हालात और भी गंभीर कर दिए थे. इस हमले के जवाब में भारत ने 7 मई को 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाकर नौ ठिकानों को ध्वस्त किया. इस सैन्य कार्रवाई के बाद पाकिस्तान की ओर से भी सीमाओं पर हलचल बढ़ गई थी.
इसी तनावपूर्ण स्थिति के बीच 23 अप्रैल को एक अप्रत्याशित घटना हुई जब बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) के जवान पूर्णम कुमार साहू गलती से अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर पाकिस्तान पहुंच गए. पाकिस्तान रेंजर्स ने उन्हें तुरंत हिरासत में ले लिया और कई दिनों तक भारत को कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया. हर बार यही कहा गया कि "ऊपर से निर्देश का इंतजार है.
पूर्णम कुमार साहू की पत्नी रजनी साहू ने इस दौरान फिरोजपुर पहुंचकर वरिष्ठ BSF अधिकारियों से मदद की अपील की थी. उन्होंने कहा था कि उन्हें अपने पति की सुरक्षित वापसी चाहिए, चाहे इसके लिए जितना भी इंतजार करना पड़े. आख़िरकार 10 मई को भारत और पाकिस्तान के बीच एक "अंडरस्टैंडिंग" बनी, जिसमें सीमा पर सैन्य गतिविधियों को रोकने का निर्णय लिया गया. इस समझौते के बाद ही हालात थोड़े सहज हुए और 18 दिन की लंबी प्रतीक्षा के बाद 8 मई को साहू को पाकिस्तानी हिरासत से रिहा कर दिया गया.
बुधवार सुबह करीब 10:30 बजे पूर्णम कुमार साहू को अटारी-वाघा बॉर्डर पर शांतिपूर्ण ढंग से भारत को सौंप दिया गया. बीएसएफ अधिकारियों ने बताया कि यह प्रक्रिया तय प्रोटोकॉल और मर्यादा के तहत संपन्न हुई. अटारी सीमा पर जवान की मुस्कुराती हुई वापसी देखकर उनकी पत्नी रजनी और परिजन भावुक हो उठे. यह घटना न केवल मानवीय दृष्टिकोण से राहत देने वाली है, बल्कि यह भी दिखाती है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की रणनीति और कूटनीति कितनी प्रभावशाली साबित हो रही है. भारत अब स्पष्ट संकेत दे चुका है कि आतंक और सीमा उल्लंघन पर उसकी नीति “ज़ीरो टॉलरेंस” की है.
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