सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बार फिर से जनरल प्रोविडेंट फंड (GPF) को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। वित्त मंत्रालय ने अप्रैल से जून 2026 की तिमाही के लिए GPF की ब्याज दर की घोषणा कर दी है। इस बार भी सरकार ने ब्याज दर में किसी तरह का बदलाव नहीं किया है। इसका मतलब यह है कि कर्मचारियों को पहले की तरह ही सुरक्षित और स्थिर रिटर्न मिलता रहेगा। यह फैसला उन लाखों कर्मचारियों के लिए राहत की बात है जो लंबे समय से इस फंड पर भरोसा करते आए हैं।
सरकार के नए ऐलान के अनुसार 1 अप्रैल 2026 से 30 जून 2026 तक GPF और इससे जुड़े अन्य समान फंड्स पर 7.1 प्रतिशत सालाना ब्याज मिलता रहेगा। पिछले कई तिमाहियों से यह दर स्थिर बनी हुई है और इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। यानी सरकारी कर्मचारियों की बचत पर इस बार भी पहले जैसा ही फायदा मिलेगा। यह स्थिरता उन लोगों के लिए अच्छी मानी जा रही है जो सुरक्षित निवेश को प्राथमिकता देते हैं।
यह ब्याज दर केवल एक ही फंड तक सीमित नहीं है। इसका लाभ कई सरकारी योजनाओं और विभागों के कर्मचारियों को मिलता है। इसमें केंद्रीय सेवाओं के कर्मचारी, अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारी, रेलवे विभाग के कर्मचारी और रक्षा क्षेत्र से जुड़े लोग शामिल हैं। इन सभी के प्रोविडेंट फंड खातों पर यही 7.1 प्रतिशत की दर लागू होगी। इस तरह देशभर में काम कर रहे लाखों सरकारी कर्मचारियों को इसका सीधा लाभ मिलता है।
जनरल प्रोविडेंट फंड सरकारी कर्मचारियों के लिए एक सुरक्षित बचत योजना है। इसमें कर्मचारी अपनी मासिक सैलरी से एक निश्चित हिस्सा जमा करते हैं। यह पैसा लंबे समय तक जमा होता रहता है और उस पर ब्याज भी जुड़ता जाता है। रिटायरमेंट के समय कर्मचारी को यह पूरी राशि एक साथ मिलती है। यही कारण है कि इसे भविष्य के लिए एक मजबूत आर्थिक सहारा माना जाता है।
सरकार ने केवल GPF ही नहीं बल्कि अन्य छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में भी कोई बदलाव नहीं किया है। पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) पर भी 7.1 प्रतिशत ब्याज जारी रखा गया है। इसके अलावा सुकन्या समृद्धि योजना, वरिष्ठ नागरिक बचत योजना और नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट जैसी योजनाओं में भी दरें पहले जैसी ही बनी हुई हैं। वहीं कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) की ब्याज दर 8.25 प्रतिशत पर स्थिर है, जो प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों को थोड़ा अधिक लाभ देती है।
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