Kalashtami 2026 Date: सनातन परंपरा में कालाष्टमी का दिन बहुत श्रद्धा के साथ मनाया जाता है. यह दिन भगवान शिव के उग्र स्वरूप कालभैरव को समर्पित होता है. मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से की गई पूजा और व्रत से डर, रुकावटें और नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं. साल 2026 में कालाष्टमी के दिन एक विशेष योग बन रहा है, जिससे इस दिन का महत्व और बढ़ जाता है.
हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 9 फरवरी 2026 को सुबह 5 बजकर 1 मिनट से शुरू होगी और 10 फरवरी 2026 को सुबह 7 बजकर 27 मिनट तक रहेगी. कालाष्टमी की पूजा मेन रूप से निशा काल, यानी रात के समय की जाती है. इसी कारण इस वर्ष कालाष्टमी का व्रत 9 फरवरी 2026 को रखा जाएगा.
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, जब कालाष्टमी के दिन भगवान शिव की विशेष शक्ति पृथ्वी पर प्रभावी मानी जाती है, तब शिववास योग बनता है. इस योग में शिव और कालभैरव की आराधना करने से जीवन की परेशानिंया धीरे-धीरे कम होने लगती हैं. कहा जाता है कि इस समय किए गए जप, पूजा और साधना का फल जल्दी मिलता है और भय, शत्रु बाधा तथा धन से जुड़ी समस्याओं में राहत मिलती है.
कालाष्टमी के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें. घर के मंदिर या किसी कालभैरव मंदिर में दीपक जलाएं. भगवान कालभैरव को सरसों का तेल, काले तिल, नारियल और फूल अर्पित करें. इसके बाद भैरव चालीसा या कालभैरव अष्टक का पाठ करें. रात के समय विशेष रूप से पूजा करना शुभ माना जाता है. पूजा के बाद जरूरतमंद लोगों को भोजन कराना या दान देना अच्छा माना जाता है.
कालभैरव मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाएं.
काले कुत्ते को रोटी या मीठी रोटी खिलाएं.
काले तिल का दान करें.
'ॐ कालभैरवाय नमः' मंत्र का श्रद्धा से जाप करें.
ये उपाय मन के डर को कम करने और नकारात्मक प्रभावों से बचाव के लिए किए जाते हैं.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कालाष्टमी का व्रत और पूजा जीवन में सुरक्षा और स्थिरता प्रदान करती है. यह व्रत उन लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है जो मानसिक तनाव, विरोध या आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हों. कालभैरव की कृपा से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक सोच बढ़ती है और भय से मुक्ति मिलती है. श्रद्धा और नियम के साथ किया गया व्रत जीवन में शांति और संतुलन लाने में सहायक माना जाता है.
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