पूर्व क्रिकेटर और कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी डॉ. नवजोत कौर सिद्धू हाल ही में उत्तर प्रदेश के वृंदावन पहुंचीं, जहां उन्होंने प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज से मुलाकात की। यह मुलाकात केवल एक औपचारिक भेंट नहीं थी, बल्कि समाज सेवा और आत्म-सुधार को लेकर गहन विचार-विमर्श का अवसर भी बनी।
इस दौरान डॉ. सिद्धू ने संत प्रेमानंद महाराज से मार्गदर्शन लिया कि वे अपने भीतर किस प्रकार का सुधार करें, जिससे समाज की सेवा और बेहतर ढंग से कर सकें।
मुलाकात के दौरान डॉ. नवजोत कौर सिद्धू ने संत प्रेमानंद महाराज से कहा कि वे लंबे समय से समाज सेवा से जुड़ी हुई हैं, लेकिन वे जानना चाहती हैं कि एक सेवाभावी व्यक्ति को अपने अंदर किस तरह का बदलाव लाना चाहिए। उन्होंने पूछा कि समाज के लिए और अधिक प्रभावी काम करने के लिए आत्मिक रूप से क्या सीख जरूरी है।
संत प्रेमानंद महाराज ने डॉ. सिद्धू के सवाल का उत्तर बहुत ही सरल लेकिन गहरे अर्थ में दिया। उन्होंने कहा कि भक्ति का मतलब केवल पूजा-पाठ करना, माला जपना या मंदिर में बैठना ही नहीं होता। सच्ची भक्ति वह है, जिसमें व्यक्ति को जो भी पद, जिम्मेदारी या प्रतिष्ठा मिली है, उसका सही और ईमानदार उपयोग समाज के भले के लिए किया जाए।
View this post on Instagram
A post shared by Navjot Singh Sidhu (@navjotsinghsidhu)
पद और प्रतिष्ठा बड़ी जिम्मेदारी है
महाराज जी ने कहा कि जब किसी व्यक्ति को समाज में कोई पद या पहचान मिलती है, तो यह केवल सुविधाएं पाने का साधन नहीं होता। यह एक बड़ी जिम्मेदारी भी होती है। उन्होंने कहा कि नेताओं और प्रभावशाली लोगों को उन वर्गों पर खास ध्यान देना चाहिए, जिन्हें सरकारी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं या जो सामाजिक रूप से पिछड़े हुए हैं।
ईश्वर की कृपा सेवा से मिलती है
संत प्रेमानंद महाराज ने कहा कि समाज में प्रसिद्ध होने से ज्यादा जरूरी है सामाजिक रूप से जागरूक होना। जो व्यक्ति बिना स्वार्थ के लोगों की मदद करता है, उस पर ईश्वर की कृपा अपने आप बरसती है। सेवा का रास्ता ही व्यक्ति को सच्चे सुख और संतोष तक ले जाता है।
ईमानदारी का फल कई गुना बढ़ता है
महाराज जी ने एक उदाहरण देकर बात समझाई। उन्होंने कहा कि जैसे अगर कोई बच्चा 100 रुपये का सही उपयोग करता है, तो उसके माता-पिता उसे और अधिक जिम्मेदारी देते हैं। उसी तरह अगर हम अपने पद और अधिकार का ईमानदारी से उपयोग करें, तो प्रकृति और ईश्वर हमें और ज्यादा अवसर और सुख देते हैं।
समाज सेवा ही सबसे बड़ी भक्ति
संत प्रेमानंद महाराज ने कहा कि पद पर बैठा व्यक्ति समाज के लिए माता-पिता के समान होता है। समाज की सेवा करने का मौका मिलना अपने आप में एक आशीर्वाद है। उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति के लिए किसी विशेष दिखावे या रीति-िवाज की जरूरत नहीं होती। अगर व्यक्ति निष्ठा और सच्चे मन से सेवा करता है, तो वही सबसे बड़ी पूजा है।
सोशल मीडिया पर साझा किया वीडियो
डॉ. नवजोत कौर सिद्धू ने इस आध्यात्मिक मुलाकात का वीडियो अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर भी साझा किया है। वीडियो में वे हाथ जोड़कर संत प्रेमानंद महाराज की बातें ध्यान से सुनती नजर आ रही हैं। इस वीडियो को लोगों से काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है और कई लोग इसे प्रेरणादायक बता रहे हैं।
Most Viewed
Viral
Copyright © 2026 The Samachaar
