पंजाब सरकार ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को नई मजबूती देने की दिशा में एक अहम और दूरदर्शी प्रशासनिक कदम उठाया है। सरकार ने चार प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों को बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (BFUHS), फरीदकोट के अधीन पूरी तरह ट्रांसफर करने का फैसला लिया है। इस निर्णय को मंत्रिमंडल की मंजूरी मिल चुकी है और इसका उद्देश्य इलाज, मेडिकल शिक्षा और रिसर्च को एक-दूसरे से जोड़ना है।
सरकार का मानना है कि इस कदम से जहां आम लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी, वहीं मेडिकल छात्रों को भी आधुनिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण का लाभ मिलेगा।
सरकारी आदेशों के अनुसार जिन चार स्वास्थ्य संस्थानों को BFUHS के अधीन किया गया है, वे इस प्रकार हैं सिविल अस्पताल, बादल (जिला मुक्तसर), सिविल अस्पताल, श्री खडूर साहिब (जिला तरनतारन), कम्युनिटी हेल्थ सेंटर, जलालाबाद और टर्शरी कैंसर केयर सेंटर, जिला फाजिल्का इन सभी संस्थानों का प्रशासनिक नियंत्रण अब बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के पास होगा।
पंजाब सरकार का कहना है कि इन अस्पतालों को विश्वविद्यालय से जोड़ने से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आएगा। मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों के बीच बेहतर तालमेल बनेगा, जिससे मरीजों को उन्नत इलाज मिलेगा और डॉक्टरों को रिसर्च व ट्रेनिंग का बेहतर अवसर प्राप्त होगा।
सरकारी आदेशों में साफ किया गया है कि अब इन चारों संस्थानों पर होने वाला पूरा खर्च बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज वहन करेगी। इसमें डॉक्टरों और कर्मचारियों का वेतन, प्रशासनिक खर्च और सामान्य संचालन से जुड़ी सभी जिम्मेदारियां शामिल होंगी।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि फिलहाल इन अस्पतालों में काम कर रहे डॉक्टर और कर्मचारी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अधीन ही रहेंगे। भविष्य में विभाग की नीति के अनुसार उन्हें अन्य स्थानों पर तैनात किया जा सकता है। इस पूरी प्रक्रिया में कर्मचारियों की सीनियरिटी, पद और कैडर व्यवस्था पूरी तरह सुरक्षित रहेगी।
BFUHS को जरूरत पड़ने पर अपने डॉक्टर और अन्य स्टाफ नियुक्त करने का अधिकार भी दिया गया है, ताकि अस्पतालों के कामकाज में किसी प्रकार की बाधा न आए। इसके साथ ही अस्पतालों की इमारतें, मशीनरी और सभी मौजूदा उपकरण भी अब यूनिवर्सिटी के नियंत्रण में रहेंगे।
सरकारी आदेशों के अनुसार BFUHS इन संस्थानों का उपयोग मेडिकल शिक्षा, रिसर्च और नए कोर्स शुरू करने के लिए कर सकता है। हालांकि सरकार ने यह शर्त भी रखी है कि इन संस्थानों में आम जनता के लिए कम से कम 100 बेड वाले अस्पताल के बराबर स्वास्थ्य सेवाएं हर हाल में जारी रहनी चाहिए। मरीजों से ली जाने वाली फीस भी राज्य सरकार की मौजूदा दरों के अनुसार ही होगी।
इन संस्थानों के ट्रांसफर के बावजूद पंजाब सरकार राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय कल्याणकारी योजनाओं जैसे जननी सुरक्षा योजना और माता कौशल्या योजना के लिए पहले की तरह फंड उपलब्ध कराती रहेगी। यह जानकारी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव कुमार राहुल द्वारा जारी अधिसूचना में दी गई है।
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