भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के पूर्व अध्यक्ष इंदरजीत सिंह बिंद्रा (आईएस बिंद्रा) का रविवार, 25 जनवरी को निधन हो गया। उन्होंने 84 वर्ष की उम्र में दिल्ली स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन से भारतीय क्रिकेट प्रशासन को बड़ी क्षति पहुंची है।
BCCI ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भारतीय क्रिकेट प्रशासन की सबसे प्रभावशाली हस्तियों में से एक बताया है।
BCCI ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि आईएस बिंद्रा का विजन और नेतृत्व भारतीय क्रिकेट के संचालन और अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी पहचान को मजबूत करने में अहम रहा।
BCCI अध्यक्ष मिथुन मन्हास ने कहा कि आईएस बिंद्रा एक दूरदर्शी प्रशासक थे, जिनकी सोच ने विश्व क्रिकेट में भारत की भूमिका को नई पहचान दी। उन्होंने सिर्फ नियम और प्रशासन ही नहीं, बल्कि ऐसे संस्थान और व्यवस्थाएं खड़ी कीं, जो आज भी खिलाड़ियों और क्रिकेट जगत की सेवा कर रही हैं।
आईसीसी के चेयरमैन जय शाह ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शोक व्यक्त करते हुए लिखा कि भारतीय क्रिकेट प्रशासन के इस दिग्गज के निधन से पूरा क्रिकेट जगत दुखी है।
आईएस बिंद्रा एक अनुभवी राजनयिक और वरिष्ठ नौकरशाह रहे। वे भारत के सातवें राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह के विशेष सचिव के रूप में सेवाएं दे चुके थे। इसके बाद उन्होंने क्रिकेट प्रशासन में कदम रखा और 1993 से 1996 तक BCCI के अध्यक्ष रहे।
इसके अलावा, वे ICC के पूर्व चेयरमैन शरद पवार के प्रमुख सलाहकार भी रहे। अपने मजबूत संपर्कों और प्रशासनिक अनुभव के दम पर उन्होंने BCCI और ICC के कई बड़े फैसलों को दिशा दी।
आईएस बिंद्रा का पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन (PCA) से भी गहरा रिश्ता रहा। वे 1978 से 2014 तक PCA के अध्यक्ष रहे। इसी दौरान उन्होंने पंजाब में क्रिकेट ढांचे को मजबूत किया और युवाओं को बेहतर सुविधाएं दिलाईं।
आईएस बिंद्रा का सबसे बड़ा योगदान BCCI को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में माना जाता है। उन्होंने एनकेपी साल्वे और जगमोहन डालमिया के साथ मिलकर 1987 क्रिकेट वर्ल्ड कप को भारत की मेजबानी में आयोजित कराने में अहम भूमिका निभाई। यह पहली बार था जब वर्ल्ड कप इंग्लैंड से बाहर खेला गया।
इस कदम से एशियाई देशों का क्रिकेट में दबदबा बढ़ा और पश्चिमी देशों का एकाधिकार टूटा। इसके बाद 1996 वर्ल्ड कप भी भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका की संयुक्त मेजबानी में हुआ।
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