कांग्रेस पार्टी ने डॉ. नवजोत कौर सिद्धू को पार्टी से बाहर कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब कुछ ही दिन पहले उन्होंने खुद कांग्रेस से इस्तीफा देने की घोषणा की थी। पार्टी की ओर से यह जानकारी पंजाब मामलों के प्रभारी भूपेश बघेल ने शुक्रवार को दी। उनके मुताबिक, डॉ. सिद्धू ने हाल ही में सोशल मीडिया पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ बेहद तीखी और आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं, जो पार्टी अनुशासन के खिलाफ थीं।
डॉ. नवजोत कौर सिद्धू ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में राहुल गांधी पर सीधा हमला बोला। उन्होंने राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि वे जमीनी हकीकत से पूरी तरह कटे हुए हैं और उनके आसपास ऐसे लोग हैं जो सिर्फ अपने फायदे के बारे में सोचते हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी खुद को ही सबसे ईमानदार और समझदार नेता मानते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि उन्हें जमीन पर हो रही घटनाओं की कोई जानकारी नहीं है।
अपने पोस्ट में डॉ. सिद्धू ने राहुल गांधी के लिए ‘पप्पू’ शब्द का इस्तेमाल किया, जो आमतौर पर बीजेपी नेताओं द्वारा राहुल गांधी का मजाक उड़ाने के लिए प्रयोग किया जाता रहा है। उन्होंने लिखा कि अब राहुल गांधी ने खुद अपने नाम पर मुहर लगा दी है। उनके अनुसार, राहुल गांधी को आपात स्थिति में भी फैसला लेने में छह महीने से ज्यादा समय लग जाता है, और तब तक नुकसान हो चुका होता है।
डॉ. सिद्धू का कहना था कि राहुल गांधी के करीबी लोग उन्हें सच्चाई से दूर रखते हैं और खुद ऐशो-आराम की जिंदगी जीते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि टिकट बांटने जैसे अहम फैसले राहुल गांधी के निर्णय लेने से पहले ही बेच दिए जाते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब राहुल गांधी दूसरों से ईमानदारी की उम्मीद करते हैं, तो पहले उन्हें अपने आसपास मौजूद तथाकथित समर्थकों की सच्चाई जांचनी चाहिए।
कांग्रेस से उनके रिश्ते पहले से ही तनावपूर्ण चल रहे थे। दिसंबर 2025 में डॉ. नवजोत कौर सिद्धू को पार्टी ने निलंबित कर दिया था। यह कार्रवाई उनके उस बयान के बाद हुई थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि पंजाब का मुख्यमंत्री बनने के लिए 500 करोड़ रुपये का “सूटकेस” चाहिए। इस बयान को पार्टी ने बेहद विवादास्पद और अनुशासनहीन माना था।
डॉ. सिद्धू लगातार पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर राजा वड़िंग पर भी हमलावर रही हैं। उन्होंने वड़िंग को अयोग्य और भ्रष्ट बताया और आरोप लगाया कि वे मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ मिलकर कांग्रेस को कमजोर कर रहे हैं। वहीं, अमरिंदर राजा वड़िंग का कहना है कि डॉ. सिद्धू को अनुशासनहीनता के चलते पहले ही निलंबित किया जा चुका था और सोशल मीडिया पोस्ट के बाद मामला और गंभीर हो गया।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक और राजनीतिक संदेश भी छिपा माना जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने हाल ही में डॉ. सिद्धू को वापस पार्टी में लाने की बात कही थी। ऐसे में भूपेश बघेल का बयान पार्टी के भीतर यह साफ संकेत माना जा रहा है कि कांग्रेस नेतृत्व इस मामले में कोई नरमी नहीं दिखाना चाहता और सभी नेताओं को पार्टी लाइन का पालन करना होगा।
डॉ. नवजोत कौर सिद्धू ने अपने एक अन्य पोस्ट में बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ भी की। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने उनकी प्रतिभा को पहचाना था और उन्हें मुख्य संसदीय सचिव (CPS) बनाया था। इसके बाद से यह अटकलें तेज हो गई हैं कि सिद्धू दंपति भविष्य में बीजेपी में शामिल हो सकते हैं।
हालांकि, नवजोत सिंह सिद्धू फिलहाल सक्रिय राजनीति से दूर हैं। उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर अब भी राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ तस्वीरें मौजूद हैं। फिर भी, डॉ. सिद्धू के हालिया बयानों और कांग्रेस पर लगातार हमलों ने यह साफ कर दिया है कि उनका कांग्रेस से रिश्ता पूरी तरह टूट चुका है।
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