Mayor Election: चंडीगढ़ नगर निगम के मेयर चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्म हो चुका है. 29 जनवरी को होने वाले इस अहम चुनाव में अब मुकाबला पूरी तरह तीन तरफा हो गया है. कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बाद भारतीय जनता पार्टी ने भी अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर दिया है, जिससे ये चुनाव और भी दिलचस्प हो गया है.
भारतीय जनता पार्टी ने मेयर पद के लिए सौरभ जोशी को अपना उम्मीदवार घोषित किया है. बीजेपी का मानना है कि मौजूदा नगर निगम में उसकी मजबूत स्थिति को देखते हुए पार्टी सत्ता पर अपनी पकड़ बनाए रखने में कामयाब रहेगी. पार्टी ने संगठनात्मक मजबूती और पार्षदों की संख्या के दम पर जीत का दावा किया है.
कांग्रेस ने इस बार आम आदमी पार्टी के साथ किसी भी तरह के पूर्व-चुनावी गठबंधन से साफ इनकार कर दिया है. पार्टी ने ऐलान किया है कि वह अपने बलबूते मेयर चुनाव लड़ेगी. कांग्रेस आज दोपहर 1 बजे मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद के लिए नामांकन दाखिल करेगी. मेयर पद के लिए गुरप्रीत गाबी, सीनियर डिप्टी मेयर के लिए सचिन गालव और डिप्टी मेयर पद के लिए निर्मला देवी को उम्मीदवार बनाया गया है.
आम आदमी पार्टी भी पूरी ताकत के साथ चुनावी मैदान में उतर चुकी है. AAP ने मेयर पद के लिए वार्ड नंबर 25 से पार्षद योगेश ढींगरा को टिकट दिया है. वहीं सीनियर डिप्टी मेयर पद के लिए मुनव्वर खान और डिप्टी मेयर पद के लिए जसविंदर कौर को मैदान में उतारा गया है. पार्टी का फोकस नगर निगम में पारदर्शिता और विकास को बड़ा मुद्दा बनाने पर है.
चंडीगढ़ नगर निगम के 35 सदस्यीय सदन में बीजेपी के पास 18 सीटें हैं, जबकि आम आदमी पार्टी के पास 11 और कांग्रेस के पास 6 पार्षद हैं. मेयर चुनाव जीतने के लिए 18 वोटों की जरूरत होती है. आंकड़ों के लिहाज से बीजेपी बहुमत के आंकड़े को छू रही है, लेकिन विपक्ष के अलग-अलग लड़ने से वोटों के बंटने की संभावना भी बनी हुई है.
साल 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने मिलकर चुनाव लड़ा था और मनीष तिवारी को समर्थन दिया था. हालांकि, इस बार आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाते हुए गठबंधन से दूरी बना ली है. गठबंधन टूटने से दोनों दलों का संभावित संयुक्त वोट बैंक अब बिखर चुका है.
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में बीजेपी की स्थिति मजबूत जरूर दिखती है, लेकिन मुकाबला पूरी तरह एकतरफा नहीं है. कांग्रेस और आप के अलग-अलग मैदान में उतरने से नतीजे अप्रत्याशित हो सकते हैं. अब सभी की निगाहें 29 जनवरी पर टिकी हैं, जब चंडीगढ़ नगर निगम को नया मेयर मिलेगा और सियासत की नई दिशा तय होगी.
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