पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा के बयान को लेकर पंजाब की राजनीति गरमा गई है. आम आदमी पार्टी (आप) ने बाजवा के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है. चंडीगढ़ में आप नेताओं ने कांग्रेस और प्रताप बाजवा के विरोध में प्रदर्शन करते हुए सड़कों पर उतरकर अपना आक्रोश जाहिर किया. यह विरोध कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ पर दिए गए विवादित बयान को लेकर किया गया.
आप नेताओं ने चंडीगढ़ के सेक्टर-4 में बैंड-बाजे के साथ प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि प्रताप बाजवा का बयान न केवल एक मंत्री का अपमान है, बल्कि यह दलित समाज के प्रति कांग्रेस की सोच को भी उजागर करता है. प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं की भाषा और मानसिकता दलित विरोधी रही है, जिसे अब खुले तौर पर देखा जा सकता है.
कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ ने बाजवा के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस टिप्पणी से उन्हें गहरा आघात पहुंचा है. उन्होंने कहा कि उनके पिता बैंड-बाजे का काम करते थे और उसी मेहनत के दम पर उन्होंने पढ़ाई की और आगे बढ़े. ईटीओ ने कहा कि उन्होंने कभी कोई गलत काम नहीं किया, बल्कि ईमानदारी और मेहनत से अपनी पहचान बनाई है. उन्होंने आरोप लगाया कि बाजवा का बयान सिर्फ उनके खिलाफ नहीं, बल्कि पूरे दलित समाज के सम्मान के खिलाफ है.
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने भी प्रताप बाजवा के बयान की कड़ी निंदा की. उन्होंने कहा कि हरभजन सिंह ईटीओ गरीबी से निकलकर अपनी मेहनत से सिविल सर्विस परीक्षा पास करने वाले व्यक्ति हैं. समाज सेवा के उद्देश्य से उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ी और आम आदमी पार्टी से जुड़े. आप ने उन्हें सम्मान दिया और मंत्री बनाया, लेकिन कांग्रेस नेता उनके संघर्ष का मजाक उड़ा रहे हैं. चीमा ने आरोप लगाया कि प्रताप बाजवा लगातार दलित समाज का अपमान करते आए हैं.
वन मंत्री लाल चंद कटारूचक्क ने भी इस बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि बाजवा की ऐसी टिप्पणियां कोई नई बात नहीं हैं. इससे पहले भी वह मजदूर वर्ग और दलित पृष्ठभूमि से आने वाले नेताओं पर टिप्पणी करते रहे हैं. कटारूचक्क ने आरोप लगाया कि बाजवा अपनी ही पार्टी के दलित नेताओं के खिलाफ भी अपमानजनक बयान दे चुके हैं.
इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि प्रताप बाजवा का बयान पंजाब की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर चुका है. आम आदमी पार्टी इसे दलित सम्मान से जोड़कर आक्रामक रुख अपनाए हुए है, वहीं आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी टकराव और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं.
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