Border 2: साल 1997 में रिलीज हुई फिल्म ‘बॉर्डर’ सिर्फ एक फिल्म नहीं थी, बल्कि भारतीय सिनेमा में देशभक्ति की एक यादगार मिसाल बन गई. आज जब ‘बॉर्डर 2’ की चर्चाएं हो रही हैं, तो पहली फिल्म से जुड़े कई किस्से फिर से चर्चा में आ गए हैं. इस फिल्म को बनाना जितना रोमांचक था, उतना ही जोखिम भरा भी.
निर्देशक जेपी दत्ता ने फिल्म को किसी सामान्य स्टूडियो फिल्म की तरह नहीं, बल्कि असली युद्ध जैसी सच्चाई के साथ पर्दे पर उतारने का फैसला किया. फिल्म 1971 के भारत-पाक युद्ध पर आधारित थी और इसे राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में शूट किया गया.
शूटिंग के दौरान भारतीय सेना ने पूरी मदद की. उन्होंने असली टैंक, असली हथियार और असली बारूद तक उपलब्ध कराया. फिल्म में इन असली उपकरणों के इस्तेमाल के कारण सेट पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे. एक छोटी सी चूक बड़ा हादसा बन सकती थी.
फिल्म में दिखाए गए युद्ध और पाकिस्तान की हार को लेकर जेपी दत्ता को फिल्म रिलीज के बाद जान से मारने की धमकियां मिलीं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, डायरेक्टर को अपने साथ 2-3 महीने तक बॉडीगार्ड रखना पड़ा. ये बताता है कि सच्चाई दिखाने की कीमत कितनी भारी थी.
रिलीज के बाद ‘बॉर्डर’ ने इतिहास रच दिया. फिल्म सुपरहिट साबित हुई और इसके गाने, डायलॉग और युद्ध दृश्य आज भी लोगों के दिल को छू जाते हैं. फिल्म 10 करोड़ रुपये के बजट में बनी थी और बॉक्स ऑफिस पर लगभग 6 गुना ज्यादा कमाई की. 1997 में ये साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी.
फिल्म में लेफ्टिनेंट धर्मवीर के किरदार के लिए कई बड़े सितारों से संपर्क किया गया था, लेकिन सभी ने इसे करने से मना कर दिया. अंततः अक्षय खन्ना ने यह भूमिका निभाई. इसके अलावा संजय दत्त, जूही चावला और मनीषा कोइराला जैसे सितारे फिल्म का हिस्सा नहीं बन पाए. कुछ ने छोटे रोल होने की वजह से मना किया, जबकि संजय दत्त जेल में होने के कारण उनकी जगह जैकी श्रॉफ ने ली.
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