बॉलीवुड की दुनिया में कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं, जो वक्त और हालात से ऊपर उठ जाते हैं. अनुपम खेर और सतीश कौशिक की दोस्ती भी उन्हीं में से एक थी. थिएटर से फिल्मों तक का सफर उन्होंने साथ तय किया और इस दौरान ऐसे कई पल आए जो अब मीठी याद बन चुके हैं. ऐसा ही एक किस्सा है 80 रुपये की उधारी का, जिसने इस दोस्ती को और भी खास बना दिया.
अपने स्ट्रगल के दिनों में, जब न स्टारडम था और न ही बैंक बैलेंस, अनुपम खेर को एक बार अपने दोस्त सतीश कौशिक से 80 रुपये उधार लेने पड़े थे. ये वो दौर था जब दोनों नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से निकलकर मुंबई में करियर बनाने की कोशिशों में जुटे थे. पैसों की तंगी आम बात थी, लेकिन दोस्तों से मदद लेना उतना ही आसान.
सालों बाद जब दोनों कलाकार कपिल शर्मा के शो पर पहुंचे, तो सतीश कौशिक ने इस किस्से को बेहद मजेदार अंदाज में शेयर किया. उन्होंने बताया कि अनुपम ने उनसे 80 रुपये लिए थे, लेकिन वापस किए सिर्फ 60. सतीश ने कहा- “मैं दिल्ली का हूं, तुझे छोड़ूंगा नहीं. अगर मेरे पैसे नहीं मिले ना, तो तोड़ डालूंगा… फोड़ डालूंगा.” इस पर अनुपम ने हंसते हुए जवाब दिया- "बीस रुपये तो मैंने आज तक नहीं दिए."

सिर्फ ये किस्सा ही नहीं, बल्कि इन दोनों की दोस्ती ऐसे कई किस्सों से भरी पड़ी है. फिल्म इंडस्ट्री में जहां रिश्ते अक्सर प्रोफेशनल रह जाते हैं, वहां अनुपम और सतीश की बॉन्डिंग दिल से दिल की थी. करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने एक-दूसरे का साथ दिया और बाद में भी जब दोनों स्थापित हो गए, तो वो अपनापन कभी नहीं बदला.
सतीश कौशिक को हम सभी ने 'कैलेंडर' (मिस्टर इंडिया) जैसे किरदारों में खूब पसंद किया, लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि उन्होंने सलमान खान की सुपरहिट फिल्म तेरे नाम को भी डायरेक्ट किया था. सतीश ने 'दीवाना मस्ताना', 'साजन चले ससुराल', 'हसीना मान जाएगी' जैसी कई हिट फिल्मों में भी अहम किरदार निभाए.
सतीश कौशिक का निधन 67 साल की उम्र में, 9 मार्च 2023 को हो गया. उनके जाने से फिल्म इंडस्ट्री में न सिर्फ एक उम्दा अभिनेता की कमी हो गई, बल्कि अनुपम खेर जैसे दोस्तों के लिए एक खालीपन भी हमेशा के लिए रह गया.
80 रुपये शायद किसी के लिए मायने न रखते हों, लेकिन इस किस्से के जरिए जो दोस्ती की गहराई सामने आती है, वो अनमोल है. अनुपम खेर आज भी इस बात को मुस्कुराते हुए याद करते हैं और कहते हैं- “बीस रुपये तो आज भी नहीं दिए…” शायद यही रिश्ता असली होता है- जहां उधारी में भी अपनापन झलकता है.
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