भारत में हाई-स्पीड इंटरनेट सेवाओं का एक नया युग शुरू होने जा रहा है. एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट कंपनी Starlink को भारत में काम करने के लिए आधिकारिक तौर पर लाइसेंस मिल गया है. यह जानकारी खुद केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा की.
सिंधिया ने SpaceX की प्रेसिडेंट और COO ग्वेने शॉटवेल के साथ अपनी मीटिंग के बारे में बताते हुए लिखा कि भारत की डिजिटल क्रांति के लिए सैटेलाइट टेक्नोलॉजी बेहद अहम है. उन्होंने Starlink को लाइसेंस मिलने को "एक शानदार शुरुआत" बताया और कहा कि यह कदम प्रधानमंत्री मोदी के डिजिटल इंडिया विजन को आगे बढ़ाएगा.
Had a productive meeting with Ms. @Gwynne_Shotwell, President & COO of @SpaceX, on India’s next frontier in connectivity. We delved into opportunities for collaboration in satellite communications to power Digital India’s soaring ambitions and empower every citizen across the… pic.twitter.com/gGiCLC5e1C
— Jyotiraditya M. Scindia (@JM_Scindia) June 17, 2025
Starlink के आने से अब दूरदराज और ग्रामीण इलाकों में भी इंटरनेट की पहुंच आसान होगी. Starlink की तकनीक धरती के ऊपर मौजूद सैकड़ों सैटेलाइट्स के जरिए डेटा भेजती है, जिससे ट्रैडिशनल मोबाइल नेटवर्क की सीमाओं को पार किया जा सकता है.
भारत की दो बड़ी टेलीकॉम कंपनियां Jio और Airtel ने Starlink के साथ मिलकर देशभर में इंटरनेट सेवा को बढ़ाने की योजना बनाई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये कंपनियां Starlink के उपकरणों को अपने रिटेल नेटवर्क के जरिए बेचेंगी. साथ ही Jio कस्टमर को इंस्टॉलेशन और एक्टिवेशन में भी मदद करेगा.
Starlink की शुरुआत से अब न सिर्फ आम लोगों को बेहतर इंटरनेट मिलेगा, बल्कि हेल्थकेयर सेंटर, स्कूल और छोटे व्यवसायों को भी डिजिटल सुविधा मिलेगी. यह सेवा भारत में डिजिटल अंतर को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.
Starlink को लाइसेंस मिलने से भारत में इंटरनेट कनेक्टिविटी की तस्वीर बदल सकती है. आने वाले समय में यह सेवा खासकर उन क्षेत्रों में क्रांति ला सकती है, जहां अभी तक इंटरनेट की पहुंच मुश्किल थी. अब देखना होगा कि Starlink कितनी जल्दी और कितनी व्यापकता से देश में अपनी पकड़ बनाता है.
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