पंजाब पुलिस के रिटायर अफसर इंदरजीत सिंह सिद्धू को समाज सेवा और सफाई से जुड़े कामों के लिए पद्मश्री सम्मान दिया जाएगा. इसकी घोषणा केंद्र सरकार ने गणतंत्र दिवस से पहले की है. 80 साल की उम्र में भी सिद्धू पूरे जोश और अनुशासन के साथ लोगों के लिए काम कर रहे हैं. उनका जीवन बताता है कि अगर मन में कुछ अच्छा करने की चाह हो, तो उम्र कभी भी रास्ते की रुकावट नहीं बनती.
इंदरजीत सिंह सिद्धू ने साल 1963 में पंजाब पुलिस में अपनी सेवाएं शुरू की थीं. करीब तीन दशक तक उन्होंने पुलिस विभाग में जिम्मेदार पदों पर रहते हुए ईमानदारी और अनुशासन के साथ काम किया. वर्ष 1996 में वे उप महानिरीक्षक (DIG) के पद से सेवानिवृत्त हुए. आमतौर पर लोग रिटायरमेंट के बाद आराम की जिंदगी चुनते हैं, लेकिन सिद्धू ने समाज के लिए कुछ करने का रास्ता चुना. उन्होंने तय किया कि अब उनका समय समाज और लोगों की भलाई के लिए समर्पित रहेगा.
सेवानिवृत्ति के बाद इंदरजीत सिंह सिद्धू चंडीगढ़ में रहने लगे और पूरी तरह समाज सेवा में जुट गए. वे लगातार स्वच्छता अभियानों, सामाजिक जागरूकता कार्यक्रमों और जनहित से जुड़े कार्यों में सक्रिय रहे. गंदगी हटाने, लोगों को साफ-सफाई के प्रति जागरूक करने और सार्वजनिक स्थानों को स्वच्छ रखने में उनकी अहम भूमिका रही है. उनका मानना है कि साफ वातावरण ही स्वस्थ समाज की नींव होता है.
इंदरजीत सिंह सिद्धू की दिनचर्या बहुत सादी और नियमों वाली है. वे रोज सुबह समय पर उठते हैं, थोड़ी देर पैदल चलते हैं और फिर लोगों की मदद के काम में जुट जाते हैं. जरूरतमंदों का साथ देना, बुजुर्गों को सही सलाह देना और युवाओं को अच्छा सोचने की प्रेरणा देना उनकी रोज़ की आदत में शामिल है. उनके जानने वाले कहते हैं कि बढ़ती उम्र ने कभी भी उनके हौसले और जोश को कम नहीं किया.
इंदरजीत सिंह सिद्धू के साथ इस वर्ष कई अन्य हस्तियों को भी पद्मश्री के लिए चुना गया है, जिनमें खेल, कला और आध्यात्मिक क्षेत्र से जुड़े नाम शामिल हैं. सिद्धू का कहना है कि समाज को कुछ लौटाना हर नागरिक की जिम्मेदारी है. उनका पद्मश्री चयन न सिर्फ उनकी मेहनत की पहचान है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि अच्छे काम करने की कोई उम्र नहीं होती. उनका जीवन यह सिखाता है कि सेवा और समर्पण से ही असली सम्मान मिलता है.
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