SYL Dispute: सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर को लेकर सालों से चल रहे पंजाब और हरियाणा के विवाद पर अब समाधान की उम्मीद दिखाई देने लगी है. मंगलवार को चंडीगढ़ में इस मुद्दे पर दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की अहम बैठक हुई. बैठक में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी शामिल हुए. बातचीत के बाद दोनों नेताओं ने कहा कि चर्चा सकारात्मक माहौल में हुई है और अब लगता है कि यह पुराना झगड़ा सुलझाया जा सकता है.
बैठक के बाद संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि जब बातचीत अच्छे माहौल में होती है, तो नतीजे भी अच्छे निकलते हैं. उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार यह बैठक हुई है और अब दोनों राज्यों के अधिकारी आपस में बैठकर मौजूदा हालात की समीक्षा करेंगे. अधिकारी अपनी-अपनी रिपोर्ट तैयार करेंगे, जिसके आधार पर आगे का फैसला लिया जाएगा.
वहीं पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भावनात्मक अंदाज में बात रखते हुए कहा कि पंजाब और हरियाणा भाई-भाई हैं. उन्होंने कहा कि ‘हम भाई कन्हैया जी के वारिस हैं, जिन्होंने युद्ध में भी दुश्मनों को पानी पिलाया.’ भगवंत मान ने हरियाणा को पंजाब का छोटा भाई बताते हुए उम्मीद जताई कि नई पीढ़ी का नेतृत्व इस पुराने विवाद का हल जरूर निकालेगा. उन्होंने यह भी कहा कि अधिकारी महीने में तीन-चार बार बैठक कर सकते हैं ताकि पानी के मसले का स्थायी समाधान निकाला जा सके.
एसवाईएल नहर विवाद की शुरुआत 1981 में हुए एक समझौते से हुई थी. इसके तहत सतलुज और यमुना नदियों के पानी के बंटवारे के लिए नहर बनाने की योजना बनी. 1982 में नहर का निर्माण शुरू हुआ, लेकिन 1990 में काम रुक गया. हरियाणा ने 1996 में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. 2002 में कोर्ट ने पंजाब को नहर का निर्माण पूरा करने का आदेश दिया.
हालांकि 2004 में पंजाब सरकार ने जल समझौतों को रद्द कर दिया और बाद में नहर के लिए अधिग्रहीत जमीन को भी डिनोटिफाई कर दिया गया. सुप्रीम कोर्ट ने 2016 में इस कानून को रद्द कर दिया और मौजूदा स्थिति बनाए रखने का आदेश दिया.
एसवाईएल नहर की कुल लंबाई करीब 214 किलोमीटर है. इसमें से 92 किलोमीटर हिस्सा हरियाणा में बन चुका है, जबकि पंजाब में 122 किलोमीटर का निर्माण अभी तक नहीं हो पाया है. कई जगह खुदाई की गई जमीन को दोबारा भर दिया गया है.
फिलहाल दोनों राज्यों के बीच बातचीत की पहल को सकारात्मक माना जा रहा है. अगर अधिकारियों की रिपोर्ट पर सहमति बनती है, तो आने वाले समय में इस दशकों पुराने विवाद का हल निकलने की उम्मीद की जा रही है.
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