पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे 100 किलोमीटर लंबे डिफेंस हाईवे के निर्माण के लिए पेड़ों की कटाई को सशर्त मंजूरी दे दी है। कोर्ट ने साफ किया है कि यह अनुमति बिना शर्त नहीं है, बल्कि पर्यावरण सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई कड़े नियम लगाए गए हैं। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि जितने पेड़ काटे जाएंगे, उनके बदले कम से कम दस गुना पौधे लगाए जाएंगे।
चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) को निर्माण कार्य आगे बढ़ाने की अनुमति दी, लेकिन पर्यावरणीय शर्तों का पालन अनिवार्य कर दिया। अदालत ने कहा कि अगर पौधरोपण के लिए अतिरिक्त जमीन की जरूरत पड़ेगी, तो वह भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए। कोर्ट का मानना है कि विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण भी उतना ही जरूरी है।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि 24 दिसंबर 2025 को लगाया गया पेड़ों की कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध, सड़ चुके या गिरने की हालत में खड़े खतरनाक पेड़ों पर लागू नहीं होगा। ऐसे पेड़ जो जान-माल के लिए खतरा बन चुके हैं, उन्हें सक्षम प्राधिकारी की अनुमति लेकर काटा जा सकता है। इसके अलावा, निजी भूमि पर लगे पॉपुलर और यूकेलिप्टस के पेड़ों पर भी यह रोक लागू नहीं होगी।
NHAI के वकील ने अदालत को बताया कि यह डिफेंस हाईवे ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड दोनों तरह की परियोजना है, जिसमें 63 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि का उपयोग किया जाना है। यह सड़क भारत–पाक सीमा की सुरक्षा जरूरतों से सीधे जुड़ी हुई है और इसे राष्ट्रीय महत्व की परियोजना माना जा रहा है।
हाईकोर्ट ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) की याचिका पर भी सुनवाई की, जिसमें 18 मेगावाट की सोलर पावर परियोजना के लिए 4,056 से अधिक पेड़ काटने की अनुमति मांगी गई है। अदालत ने संबंधित सक्षम प्राधिकारी को तीन सप्ताह के भीतर इस पर फैसला लेने का निर्देश दिया है।
अदालत ने कहा कि राज्य की नीति में भले ही न्यूनतम पांच गुना पौधरोपण का प्रावधान हो, लेकिन जहां संभव हो वहां अधिक कठोर और बेहतर पर्यावरणीय मानकों को अपनाया जाना चाहिए। इसी कारण दस गुना पौधरोपण को जरूरी बताया गया है।
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