पंजाब रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) ने राज्य में रियल एस्टेट विकास को लेकर गंभीर चिंता जताई है। RERA का कहना है कि भवनों और हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को मंजूरी देने वाली सक्षम संस्थाओं में दूरदृष्टि की भारी कमी दिखाई दे रही है। इसी वजह से अनियंत्रित और अव्यवस्थित विकास हो रहा है, जिसका खामियाजा आम लोगों को रोज़मर्रा की जिंदगी में भुगतना पड़ रहा है।
RERA सदस्य अरुणवीर वशिष्ठ ने चंडीगढ़ के आसपास, खासकर ज़ीरकपुर क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि यहां राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के किनारे धड़ल्ले से ऊंची इमारतें खड़ी कर दी गई हैं। इसका नतीजा यह हुआ कि सड़कों पर ट्रैफिक का बोझ असहनीय हो गया है और जाम अब स्थायी समस्या बन चुका है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में प्रोजेक्ट्स को मंजूरी कैसे दी गई, जबकि भविष्य की जरूरतों और ट्रैफिक प्रभाव का सही आकलन नहीं किया गया।
RERA का मानना है कि या तो क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर की रणनीतिक योजनाएं बनी ही नहीं, या फिर अगर बनी हैं तो उन्हें पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है। मुख्य सड़कों और हाईवे के बिल्कुल किनारे आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं का “मशरूम की तरह” उग आना इस बात का साफ संकेत है कि भविष्य में होने वाली समस्याओं पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया गया।
RERA ने रियल एस्टेट सेक्टर को पारदर्शी, स्वस्थ और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कई अहम सुझाव दिए हैं। इनमें एक सिंगल-विंडो, API आधारित क्लीयरेंस सिस्टम बनाने की सिफारिश की गई है, जिससे अलग-अलग विभागों के चक्कर न लगाने पड़ें। इसके अलावा जमीन के रिकॉर्ड को पूरी तरह डिजिटल करने और टाइटल गारंटी सिस्टम लागू करने की बात कही गई है, ताकि खरीदारों को कानूनी सुरक्षा मिल सके।
RERA ने यह भी सुझाव दिया है कि सभी रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स का बीमा अनिवार्य किया जाए, ताकि अगर कोई प्रोजेक्ट अधूरा रह जाए या लंबे समय तक लटका रहे, तो घर खरीदारों को नुकसान न उठाना पड़े। अथॉरिटी का मानना है कि इन सुधारों के बिना रियल एस्टेट सेक्टर में भरोसा बहाल करना मुश्किल होगा।
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