Punjab government: आवास और शहरी विकास विभाग ने अपनी ई-नीलामी नीति में बड़े बदलाव किए हैं. अब खरीदारों के लिए संपत्ति पर लोन लेना आसान हो गया है. इसके तहत अब उन्हें आवंटन पत्र की केवल 10% राशि और 2% कैंसर सेस जमा करवाकर संपत्ति पर लोन मिल सकेगा. इसके लिए अलग से अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी.
पहले संपत्ति पर लोन के लिए 25% राशि जमा करनी होती थी. नई नीति में यह सीमा घटा कर केवल 10% कर दी गई है. इसके अलावा, सफल बोली के बाद अब आवंटन पत्र जारी होने के 30 दिन के भीतर 15% राशि जमा करनी होगी. पहले यह राशि केवल सात दिन के भीतर जमा करनी होती थी. संपत्ति की बाकी 75% राशि जमा करने का समय अब संबंधित अथॉरिटी के मुख्य प्रशासक तय करेंगे. पहले इसके लिए दो विकल्प दिए गए थे:
1. 50% राशि 90 दिन और 10% राशि कब्जे की पेशकश के 30 दिन में जमा करना.
2. राशि को 12 तिमाही किस्तों में जमा करना.
अब मुख्य प्रशासक खरीदारों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए शेष राशि जमा करने का समय तय करेंगे.
राज्य सरकार ने व्यावसायिक संपत्तियों की नीलामी में फीस को भी कम किया है. अब मल्टीप्लैक्स, अस्पताल, होटल, नर्सिंग होम, ग्रुप हाउसिंग और स्कूल जैसी साइटों के लिए फीस इस प्रकार है:
5 करोड़ तक आरक्षित मूल्य →10 लाख रुपये फीस
10 करोड़ तक → 20 लाख रुपये
25 करोड़ तक → 50 लाख रुपये
100 करोड़ तक → 1 करोड़ रुपये
पहले ये फीस बहुत ज्यादा थी, जिससे खरीददारों पर बोझ ज्यादा पड़ता था. नई नीति से यह बोझ काफी कम हो गया है.
गमाडा की एससीओ, एससीएफ और बूथ जैसी संपत्तियों के लिए भी पात्रता शुल्क बदल दिया गया है. 1 करोड़ रुपये तक आरक्षित मूल्य वाली संपत्तियों के लिए 5 लाख रुपये फीस, 1 करोड़ से ऊपर के लिए 10 लाख रुपये फीस
राज्य सरकार ई-नीलामी के जरिए अधिक से अधिक संपत्तियों को नीलाम करना चाहती है. इससे विभाग को राजस्व मिलेगा. अकेले गमाडा से 5 से 10 हजार करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है. इस बार 5450 करोड़ रुपये की संपत्तियों की नीलामी की जा रही है. गमाडा कुल 42 प्रमुख साइटों की नीलामी कर रहा है, जिनमें आवासीय प्लॉट, एससीओ, ग्रुप हाउसिंग, मिक्स्ड लैंड यूज, अस्पताल और होटल साइट शामिल हैं.
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