पंजाब विजिलेंस विभाग ने बुधवार को शिरोमणि अकाली दल (SAD) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया को गिरफ्तार कर लिया। उन्हें आय से अधिक संपत्ति (Illegal Property) के मामले में पकड़ा गया है।
मजीठिया को अमृतसर से गिरफ्तार किया गया और फिर विजिलेंस की टीम उन्हें मोहाली कोर्ट में पेश करने के लिए लेकर गई।
मोहाली कोर्ट में पेशी से पहले ही अकाली दल के कार्यकर्ता और मजीठिया के समर्थक कोर्ट के बाहर जुटने लगे। उन्होंने जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। माहौल को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी और कोर्ट के चारों ओर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया।
कोर्ट परिसर की ओर जाने वाला रास्ता बंद कर दिया गया है।
विजिलेंस दफ्तर के बाहर भी पुलिस का पहरा लगाया गया है।
पुलिस ने मुख्य गेट बंद कर दिया है और बाहर बैरिकेड्स लगाए हैं ताकि कोई हंगामा न हो।
विजिलेंस दफ्तर के वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुंचने लगे हैं।
जहां एक तरफ आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार बिक्रम मजीठिया की गिरफ्तारी को नशा माफिया के खिलाफ बड़ी कार्रवाई बता रही है, वहीं उसी पार्टी के विधायक कुंवर विजय प्रताप सिंह ने इस कार्रवाई की टाइमिंग और प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
कुंवर विजय प्रताप ने अपने फेसबुक पोस्ट में सरकार के रवैये पर नाराजगी जताते हुए लिखा: जब मजीठिया पहले जेल में थे, तब मान सरकार ने न तो उनसे पूछताछ की, न ही कोई चार्जशीट दाखिल की, और उन्हें जमानत मिल गई।
बरगाड़ी बेअदबी मामले में भी सरकार ने आरोपी परिवार से समझौता किया, जो न्याय का अपमान है।
उन्होंने कहा कि मजीठिया से उनके राजनीतिक और वैचारिक मतभेद जरूर हैं, लेकिन फिर भी हर परिवार का सम्मान जरूरी होता है, चाहे वो किसी भी पार्टी से हो।
उन्होंने सरकार की सुबह-सुबह छापा मारने की कार्रवाई को गलत बताया और कहा कि यह नीति के खिलाफ है।
कुंवर विजय प्रताप ने कहा: “हर नई सरकार पुलिस और विजिलेंस का इस्तेमाल अपने राजनीतिक फायदे के लिए करती है, लेकिन इससे कभी ठोस नतीजा नहीं निकलता।”
उन्होंने यह भी कहा कि: जब मजीठिया पहले जेल में थे, तो सरकार ने कोई रिमांड नहीं मांगी, न ही पूछताछ की।
हाई कोर्ट ने भी कहा था कि जब पूछताछ नहीं हो रही, तो किसी को जेल में रखना कानून के खिलाफ है।
अब जब मजीठिया घर पर हैं, तो छापेमारी की जा रही है और उनके परिवार की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई जा रही है।
निष्कर्ष में उन्होंने कहा: “मेरे और मजीठिया के बीच वैचारिक मतभेद जरूर हैं, लेकिन जब बात नीति, इंसानियत और नैतिकता की हो, तो हमें आवाज उठानी ही चाहिए।”
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