पंजाब समेत देश के कई राज्यों में रियल एस्टेट के नाम पर निवेशकों से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाली कंपनी के खिलाफ आखिरकार बड़ी कार्रवाई हुई है। लंबे समय से अपने फंसे हुए पैसों की आस लगाए बैठे निवेशकों के लिए यह खबर राहत लेकर आई है।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मेसर्स नेचर हाइट्स इंफ्रा लिमिटेड के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए करीब 50 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों को बैंकों को सौंप दिया है। इस कार्रवाई से न सिर्फ ठगी की परतें खुली हैं, बल्कि निवेशकों को न्याय मिलने की उम्मीद भी मजबूत हुई है।
प्रवर्तन निदेशालय के जालंधर जोनल ऑफिस ने PMLA अदालत के आदेश पर कंपनी की कुर्क की गई संपत्तियों को संबंधित बैंकों को सौंप दिया है। इस फैसले के बाद अब बैंकों को कानूनी तौर पर इन संपत्तियों की नीलामी या उपयोग का अधिकार मिल गया है, जिससे निवेशकों के फंसे हुए पैसों की रिकवरी संभव हो सकेगी।
ईडी द्वारा बैंकों को सौंपी गई सभी संपत्तियां पंजाब के फतेहगढ़ साहिब जिले में स्थित हैं। सरकारी रिकॉर्ड में इनका मूल्य करीब 20.21 करोड़ रुपये बताया गया है, जबकि मौजूदा बाजार कीमत लगभग 50 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। इससे निवेशकों को अच्छी-खासी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
जांच में सामने आया है कि मेसर्स नेचर हाइट्स इंफ्रा लिमिटेड ने जमीन और प्लॉट दिलाने के नाम पर बड़ी संख्या में निवेशकों से पैसा इकट्ठा किया था। कंपनी ने आकर्षक प्रोजेक्ट्स का लालच देकर लोगों को निवेश के लिए तैयार किया, लेकिन न तो समय पर जमीन दी गई और न ही पैसा लौटाया गया।
इस घोटाले में कई ऐसे निवेशक शामिल हैं जिन्होंने अपनी पूरी जमा-पूंजी, रिटायरमेंट के पैसे और यहां तक कि कर्ज लेकर भी निवेश किया था। जब सालों तक कोई समाधान नहीं निकला, तो पीड़ित निवेशकों ने शिकायतें दर्ज कराईं, जिसके बाद मामला जांच एजेंसियों तक पहुंचा।
निवेशकों की शिकायतों के आधार पर ईडी ने इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत जांच शुरू की। जांच में यह सामने आया कि निवेशकों से जुटाई गई रकम का गलत इस्तेमाल किया गया और धन को दूसरी जगहों पर ट्रांसफर किया गया, जो कानून का सीधा उल्लंघन है।
ईडी द्वारा संपत्तियों की कुर्की और फिर उन्हें बैंकों को सौंपे जाने के बाद अब निवेशकों के पैसे वापस मिलने की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। बैंकों के जरिए इन संपत्तियों की नीलामी कर रिकवरी की जाएगी, जिससे पीड़ितों को राहत मिल सकेगी।
इस कार्रवाई को रियल एस्टेट कंपनियों के लिए एक सख्त चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। यह साफ संकेत है कि निवेशकों से धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ सरकार और जांच एजेंसियां अब सख्ती से कार्रवाई करेंगी।
कई वर्षों के इंतजार के बाद इस कार्रवाई से निवेशकों में न्याय की उम्मीद जगी है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि संपत्तियों की नीलामी कब होती है और निवेशकों को उनका पैसा कितनी जल्दी वापस मिल पाता है।
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