आम आदमी पार्टी के नेता और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक बार फिर साबित किया कि वे सिर्फ राजनीति ही नहीं, बल्कि समाज और संस्कृति की भी गहरी समझ रखते हैं। रविवार को एक खास फिल्म स्क्रीनिंग के दौरान उन्होंने सिनेमा की ताकत पर खुलकर बात की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिनेमा समाज से जुड़ने का सबसे मजबूत माध्यम है और यह समाज का आईना होता है, जो कभी झूठ नहीं बोलता।
सीएम मान के इस बयान ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या आज के दौर में सिनेमा सिर्फ मनोरंजन तक सीमित रह गया है, या फिर वह समाज को दिशा देने का काम भी कर सकता है।
फिल्म ‘परो पिनाकी की कहानी’ की विशेष स्क्रीनिंग में शामिल हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मीडिया से बातचीत में कहा कि आज के समय में ज्यादातर लोग व्यावसायिक यानी कमर्शियल फिल्मों को ही पसंद करते हैं। ऐसी फिल्मों में ग्लैमर और मसाला तो होता है, लेकिन समाज को कोई ठोस संदेश नहीं मिलता।
उन्होंने कहा कि “बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो जोखिम उठाकर समाज को कुछ कहने वाली फिल्में बनाते हैं। सिनेमा समाज तक बात पहुंचाने का सबसे बेहतरीन माध्यम है। यह समाज का आईना है और आईना कभी झूठ नहीं बोलता।”
भगवंत मान ने फिल्म के निर्माताओं की खुले दिल से तारीफ की। उन्होंने कहा कि आज के दौर में ऐसी कहानियां बहुत कम देखने को मिलती हैं जो आम आदमी की जिंदगी को पर्दे पर दिखाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह की फिल्में बनाना आसान नहीं होता, क्योंकि इनमें बड़े सितारे या भारी बजट नहीं होता, फिर भी ये दिल को छू जाती हैं।
उन्होंने कहा कि वे फिल्म की टीम को बधाई देना चाहते हैं, क्योंकि उन्होंने समाज से जुड़ी कहानी को ईमानदारी से दिखाने का साहस किया है।
फिल्म ‘परो पिनाकी की कहानी’ एक आम आदमी की जिंदगी पर आधारित है। यह कहानी पिनाकी नाम के एक युवक की है, जो छोटे शहर में मैनहोल की सफाई का काम करता है। उसकी जिंदगी कठिनाइयों से भरी है, लेकिन फिर भी वह उम्मीद और इंसानियत से जुड़ा हुआ है।
फिल्म में पिनाकी की मुलाकात मरियम से होती है, जो सब्जी बेचने का काम करती है। दोनों की मुलाकात रोज़ाना शहर जाते समय होती है और धीरे-धीरे उनके बीच एक अनोखा और सच्चा रिश्ता बन जाता है। यह रिश्ता दिखावे से दूर, सादगी और भावनाओं से भरा हुआ है।
लेकिन कहानी उस वक्त मोड़ ले लेती है जब एक दिन मरियम अचानक गायब हो जाती है। इसके बाद पिनाकी की जिंदगी पूरी तरह बदल जाती है। वह उसे ढूंढने निकल पड़ता है और यह सफर उसके साहस, उम्मीद और प्यार की असली परीक्षा बन जाता है।
इस फिल्म का निर्देशन रुद्र जाडोन ने किया है। मुख्य भूमिकाओं में ईशिता सिंह और संजय बिश्नोई नजर आते हैं। इनके अलावा फिल्म में धनंजय सरदेशपांडे, हनुमान सोनी, प्रेरणा मोहोद, मदन देवधर, संजय ढोले, हेमंत कदम और योगेश सुदाकर कुलकर्णी जैसे कलाकार भी अहम भूमिकाओं में दिखाई देते हैं।
इससे पहले दिसंबर में इस फिल्म की एक और विशेष स्क्रीनिंग राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित की गई थी। उस मौके पर अलग-अलग राजनीतिक दलों के कई बड़े नेता मौजूद थे।
दिल्ली में हुई स्क्रीनिंग में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, सांसद जया बच्चन, राम गोपाल यादव, कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल जैसे बड़े नेता शामिल हुए थे। इससे साफ है कि यह फिल्म सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि समाज से जुड़ा गंभीर विषय है।
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