प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंजाब दौरे के दौरान साफ शब्दों में कहा कि आज का भारत गुरु रविदास जी के दिखाए रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि दशकों बाद देश अब “मिशन मोड” में काम कर रहा है, ताकि गुरु रविदास के उस सपने को साकार किया जा सके जिसमें कोई भी व्यक्ति गरीब, वंचित या अपमानित न हो। यह मिशन आज “विकसित भारत” के लक्ष्य के रूप में सामने है।
प्रधानमंत्री मोदी जालंधर के डेरा सचखंड बल्लां पहुंचे, जहां उन्होंने 15वीं शताब्दी के महान संत गुरु रविदास जी की 649वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि गुरु रविदास ने समाज को समानता, करुणा और सेवा का संदेश दिया, जो आज भी देश के लिए उतना ही प्रासंगिक है।
सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि “विकसित भारत” का अर्थ सिर्फ आर्थिक तरक्की नहीं है, बल्कि ऐसा समाज बनाना है जहां
कोई भी व्यक्ति गरीबी में जीवन जीने को मजबूर न हो
सभी को सम्मान मिले
हर नागरिक को आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें
उन्होंने भरोसा जताया कि गुरु रविदास के आशीर्वाद से भारत इस लक्ष्य को जरूर हासिल करेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने गुरु रविदास द्वारा कल्पित ‘बेगमपुरा शहर’ का जिक्र करते हुए कहा कि यह एक ऐसा समाज था जहां कोई दुखी नहीं, कोई शोषित नहीं और कोई वंचित नहीं होता। उन्होंने कहा कि आज सरकार की योजनाएं गरीब कल्याण, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय उसी विचारधारा से प्रेरित हैं।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए एडमपुर एयरपोर्ट का नाम “श्री गुरु रविदास महाराज जी एयरपोर्ट” रखने की घोषणा की। उन्होंने इसे गुरु रविदास के आदर्शों को समर्पित एक सच्ची श्रद्धांजलि बताया। इसके साथ ही लुधियाना के हलवाड़ा एयरपोर्ट के सिविल टर्मिनल का वर्चुअल उद्घाटन भी किया गया।
प्रधानमंत्री ने डेरा सचखंड बल्लां द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज सेवा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि संत निरंजन दास जी महाराज के मार्गदर्शन में डेरा न केवल पंजाब बल्कि विदेशों तक गुरु रविदास के विचार फैला रहा है।
सभा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने डेरा प्रमुख संत निरंजन दास जी के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया। उन्होंने बताया कि उनके जन्मदिन पर डेरा में विशेष अरदास की गई थी, जिसे वे अपने जीवन का एक विशेष क्षण मानते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वाराणसी, जहां से वे सांसद हैं, वही गुरु रविदास की जन्मभूमि भी है। उन्होंने कहा कि वहां की जनता के आशीर्वाद से उन्हें सेवा का अवसर मिला और वे गुरु रविदास की शिक्षाओं से प्रेरणा लेते हैं।
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