पंजाब सरकार ने जेलों में फैले भ्रष्टाचार और ड्रग्स के नेटवर्क के खिलाफ सख्त कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान की अगुवाई में 25 जेल कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया गया है। इनमें 3 डिप्टी सुपरिटेंडेंट, 2 असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट और बाकी कर्मचारी शामिल हैं।
सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई जेलों में चल रहे ड्रग्स नेटवर्क और भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए की गई है। पिछले कुछ समय से जेलों में अनियमितताओं और ड्रग्स से जुड़ी गतिविधियों की शिकायतें मिल रही थीं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर ये कड़ी कार्रवाई की गई है।
इससे पहले मार्च में सरकार ने कुख्यात गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया को पंजाब की बठिंडा सेंट्रल जेल से असम की सिलचर जेल भेज दिया था। सरकार को शक था कि भगवानपुरिया जेल में रहते हुए भी ड्रग्स और गैंग चलाता है।
भगवानपुरिया को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने ड्रग्स कानून (PIT NDPS Act) के तहत गिरफ्तार किया था। उस पर पंजाब समेत कई राज्यों में कुल 128 केस दर्ज हैं। वह पहली बार 2015 में हत्या के एक मामले में पकड़ा गया था।
भगवानपुरिया पर मशहूर पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की हत्या में शामिल होने का भी आरोप है। वह और गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई मिलकर इस साजिश में शामिल थे, बाद में दोनों अलग हो गए। भगवानपुरिया को पंजाब के सबसे खतरनाक गैंगस्टरों में से एक माना जाता है। उस पर UAPA कानून के तहत भी कई केस दर्ज हैं, जो देश की सुरक्षा से जुड़े मामलों में लगाया जाता है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने यह कदम दिखा दिया है कि अब जेलों में लापरवाही, भ्रष्टाचार और ड्रग्स का नेटवर्क बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जेल स्टाफ की जिम्मेदारी सिर्फ सुरक्षा की नहीं, बल्कि सिस्टम को साफ और पारदर्शी बनाने की भी है।
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