पंजाब में आम आदमी पार्टी को एक और बड़ा झटका लगा है. तरनतारन से विधायक और जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. कश्मीर सिंह सोहेल का शनिवार को अमृतसर के फोर्टिस अस्पताल में निधन हो गया. वह लंबे समय से कैंसर की अंतिम स्टेज से जूझ रहे थे. डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन वे जीवन की जंग हार गए.
66 वर्षीय डॉ. सोहेल पहली बार विधायक बने थे, लेकिन जनता के दिलों में उनकी पहचान एक नेकदिल डॉक्टर और जनसेवक की रही. उनके निधन की खबर ने राज्यभर में शोक की लहर दौड़ा दी है. मुख्यमंत्री भगवंत मान, अरविंद केजरीवाल, राघव चड्ढा समेत कई नेताओं ने गहरा दुख जताया है.
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'हमारी पार्टी के तरनतारन विधायक डॉ. कश्मीर सिंह सोहेल के अचानक निधन की दुखद खबर मिली है। बेहद दुखद है. वह बेहद परिश्रमी और समर्पित नेता थे। उनके परिवार के साथ इस दुख की घड़ी में शोक संवेदनाएं हैं.'
वहीं, आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी इस खबर को "बेहद दुखद" बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने लिखा कि डॉ. सोहेल "एक ईमानदार और निष्ठावान नेता थे, जिन्हें सभी दलों से सम्मान मिला.
1958 में जन्मे डॉ. कश्मीर सिंह सोहेल ने अपना मेडिकल करियर 1986 में मीनाविंड के सरकारी अस्पताल से शुरू किया था. बाद में वे तरनतारन के सिविल अस्पताल में नेत्र विशेषज्ञ के रूप में कार्यरत रहे और 2013 में वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी पद से सेवानिवृत्त हुए। उन्होंने पंजाब में आतंकवाद के कठिन दौर में भी अपनी सेवाएं जारी रखीं.
राजनीति में आने से पहले ही डॉ. सोहेल सामाजिक आंदोलनों का जाना-पहचाना चेहरा बन चुके थे. उन्होंने तरनतारन को जिला दर्जा दिलाने के लिए भूख हड़ताल की, तो वहीं स्कूलों की मनमानी फीस बढ़ोतरी के खिलाफ पेरेंट्स एसोसिएशन बनाई.
आप से जुड़कर लड़ा पहला चुनाव डॉ. सोहेल ने 2014 में आम आदमी पार्टी का दामन थामा और 2022 में तरनतारन सीट से चुनाव जीतकर विधायक बने. उन्होंने तीन बार के विधायक और अकाली दल नेता हरमीत सिंह संधू को 13,588 वोटों से हराया. वह हमेशा लो-प्रोफाइल रहकर जनसेवा में जुटे रहे और हेल्थकेयर से लेकर राजनीति तक अपनी गहरी छाप छोड़ गए.
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