दिल्ली से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक शातिर ठग खुद को भारतीय सेना का पैराकमांडो लेफ्टिनेंट बताकर लोगों को बेवकूफ बना रहा था। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। इस ठग का नाम दीपांशु है और वह कानपुर का रहने वाला है।
1 सितंबर 2025 को दिल्ली के फर्श बाजार इलाके में रहने वाली 28 साल की युवती दामिनी ने PCR कॉल करके पुलिस को शिकायत दी। दामिनी नोएडा में मेडिकल स्टोर चलाती है। उसकी मुलाकात दीपांशु से एक रिश्तेदार के जरिए हुई थी। दीपांशु अक्सर आर्मी की वर्दी पहनकर दामिनी से मिलने आता और खुद को पैराकमांडो लेफ्टिनेंट बताता।
धीरे-धीरे उसने अलग-अलग बहाने बनाकर दामिनी से करीब 70,000 रुपये ले लिए। कभी कैश, तो कभी ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के जरिए। लेकिन जब दामिनी को शक हुआ कि कहीं वह धोखेबाज़ तो नहीं, तो उसने पुलिस को कॉल कर दिया।
शिकायत मिलते ही शाहदरा जिला पुलिस की टीम ने जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि दीपांशु असली आर्मी अफसर नहीं है, बल्कि एक फर्जी कहानी गढ़कर लोगों को ठग रहा है। पुलिस ने FIR दर्ज कर दीपांशु को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस को उसके पास से कई सबूत मिले – आर्मी की नकली वर्दियां, फर्जी आईडी कार्ड, NDA पासआउट की लिस्ट और नकली अपॉइंटमेंट लेटर। उसके मोबाइल से भी आर्मी वर्दी में खींची गई तस्वीरें मिलीं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि दीपांशु ने अपने ही परिवार को भी धोखा दिया था। उसके पिता आर्मी से हवलदार के पद से रिटायर हुए हैं। दीपांशु ने NDA की परीक्षा दी थी, लेकिन पास नहीं हो सका। नाकामयाबी छिपाने के लिए उसने इंटरनेट से नकली दस्तावेज तैयार किए और घरवालों को यकीन दिला दिया कि वह NDA में चुना गया है।
इसके बाद वह असल जिंदगी में कोई पक्की नौकरी नहीं कर सका और छोटे-मोटे काम करता रहा। जब उसकी मुलाकात दामिनी से हुई, तो उसने उसी झूठ को आगे बढ़ाकर खुद को आर्मी अफसर बताया।
फिलहाल पुलिस उससे पूछताछ कर रही है कि क्या उसने इसी तरह और भी लोगों को धोखा दिया है। इस घटना ने एक बार फिर दिखा दिया है कि नकली पहचान बनाकर ठगी करने वालों से सावधान रहना कितना जरूरी है।
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