अगर आप इस साल पेरिस में छुट्टियां बिताने की योजना बना रहे हैं, तो तैयार रहें—यूरोप ट्रिप अब पहले जितनी सस्ती नहीं रही। हाल के हफ्तों में यात्रा खर्च में तेज बढ़ोतरी देखी गई है, जिससे आम लोगों के लिए विदेश घूमना थोड़ा मुश्किल हो गया है। खासतौर पर मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर सीधे हवाई सफर पर पड़ा है, जिसने पूरे ट्रिप बजट को प्रभावित कर दिया है।
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, Sanva TravelTech (Travoint) के मैनेजर राहुल चड्ढा बताते हैं कि पहले पेरिस और स्विट्जरलैंड की करीब 6 रातों की यात्रा एक कपल के लिए लगभग 2.5 से 3 लाख रुपये में हो जाती थी। अब यही खर्च बढ़कर 4.5 से 5 लाख रुपये तक पहुंच गया है। यानी कुल बजट लगभग दोगुना हो चुका है। यह बदलाव खासकर समर सीजन में ज्यादा देखने को मिल रहा है, जब भारतीय पर्यटक बड़ी संख्या में यूरोप की ओर रुख करते हैं।
इस महंगाई के पीछे सबसे बड़ा कारण हवाई किराए में उछाल है। पहले दिल्ली से पेरिस के टिकट 55,000 से 65,000 रुपये के बीच मिल जाते थे, लेकिन अब यही कीमत बढ़कर 70,000 से 80,000 रुपये हो गई है। ज्यूरिख जैसे शहरों के टिकट भी महंगे हो गए हैं। कई मामलों में तो यूरोप के बड़े शहरों के लिए टिकट 1.5 से 2 लाख रुपये प्रति व्यक्ति तक पहुंच रहा है, जिससे ट्रिप का बड़ा हिस्सा सिर्फ उड़ान पर ही खर्च हो रहा है।
भारत से यूरोप जाने वाली ज्यादातर किफायती उड़ानें मिडिल ईस्ट के रास्ते गुजरती हैं। दुबई, दोहा और अबू धाबी लंबे समय से प्रमुख ट्रांजिट हब रहे हैं। लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में इन क्षेत्रों के कुछ हवाई मार्ग प्रभावित हुए हैं, जिसके चलते एयरलाइंस को अपने रूट बदलने पड़ रहे हैं।
जब फ्लाइट्स अपने तय रास्ते से हटकर लंबा मार्ग अपनाती हैं, तो उड़ान का समय बढ़ जाता है और ईंधन की खपत भी ज्यादा होती है। इसका सीधा असर टिकट की कीमतों पर पड़ता है। यानी यात्रियों को अब न सिर्फ ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं, बल्कि कई बार उन्हें लंबा सफर भी तय करना पड़ता है।
ट्रैवल इंडस्ट्री के विशेषज्ञ मानते हैं कि यह स्थिति हमेशा नहीं रहेगी। जैसे-जैसे हालात सामान्य होंगे, फ्लाइट रूट्स फिर से पहले जैसे हो सकते हैं और किराए में कमी आ सकती है। फिलहाल, अगर आप यूरोप ट्रिप की योजना बना रहे हैं, तो ज्यादा बजट के साथ तैयार रहें। एडवांस बुकिंग और लचीली तारीखें चुनकर आप कुछ हद तक खर्च कम कर सकते हैं, जबकि कुछ लोग फिलहाल यात्रा टालना भी बेहतर विकल्प मान रहे हैं।
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