ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते युद्ध में अब अमेरिका भी खुलकर शामिल हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ने ईरान के तीन परमाणु ठिकानों नतांज, इस्फहान और फोर्डो पर हमला किया है। व्हाइट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप ने इन हमलों को "शानदार सफलता" बताया और चेतावनी दी कि अगर ईरान ने जवाबी हमला किया तो अमेरिका और कड़ी कार्रवाई करेगा।
इजराइल ने अमेरिका को इन हमलों के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि उसे पहले ही इन हमलों की जानकारी थी। इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि अमेरिका और इजराइल पूरी तरह से समन्वय में काम कर रहे हैं।
ईरान ने भी जवाबी हमला किया और इजराइल पर मिसाइलें दागीं। इसके चलते इज़राइल में 86 लोग घायल हुए हैं और अब तक 24 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, ईरान में 430 लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 3,500 लोग घायल हुए हैं। ईरानी स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह जानकारी दी है।
संघर्ष और तेज तब हुआ जब इजराइल ने 'ऑपरेशन राइजिंग लॉयन' के तहत ईरानी परमाणु और सैन्य ठिकानों पर हमला किया। इसके जवाब में ईरान ने भी इजराइल पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए।
ईरानी सरकार ने अमेरिका के इन हमलों की कड़ी निंदा की है और इसे संयुक्त राष्ट्र के नियमों और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया है। तेहरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की मांग की है।
ईरान का कहना है कि अमेरिकी हमलों से ज़्यादा नुकसान नहीं हुआ क्योंकि जरूरी सामग्री पहले ही ठिकानों से हटा दी गई थी। इजराइल की सेना अब ईरान में हुए अमेरिकी हमलों के प्रभाव की जांच कर रही है।
इस बीच पोप लियो ने कहा है कि "मानवता अब शांति की पुकार कर रही है" और सभी देशों से युद्ध बंद करने की अपील की है।
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